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India Daily

'राख का ढेर बना देंगे...', मिडिल ईस्ट में जंग के बीच ईरान ने अमेरिका को दी धमकी

मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है. युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है.

Anuj
Edited By: Anuj
'राख का ढेर बना देंगे...', मिडिल ईस्ट में जंग के बीच ईरान ने अमेरिका को दी धमकी

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहे भीषण युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. करीब 15 दिनों से जारी इस संघर्ष ने अब वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है. ईरान ने साफ कहा है कि अगर उसके तेल ढांचे पर हमले जारी रहे तो वह अमेरिका से जुड़ी तेल और ऊर्जा सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट कर देगा.

ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी कंपनियों से संबंधित प्रमुख तेल और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया जा सकता है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अगर उनके ऊर्जा ढांचे पर हमला जारी रहा तो जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकानों को 'राख का ढेर' बना दिया जाएगा. 

मिडिल ईस्ट में तनाव

इस बीच मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है. युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है. कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका भी जताई जा रही है. 

'खामेनेई की मौत का बदला लेंगे'

दूसरी ओर ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि वे अपने पिता सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेंगे. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखा जाएगा और वहां की नाकाबंदी जारी रह सकती है.

एक्सपर्ट की राय क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है. यहां से गुजरने वाला तेल वैश्विक आपूर्ति का बड़ा हिस्सा होता है. यदि इस मार्ग पर लंबे समय तक बाधा बनी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं.

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. खासतौर पर भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं, उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है.