अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी महीने के अंत से शुरू हुआ तनाव अभी तक पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है. अमेरिका ने अब इस युद्ध को अलग तरीके से लड़ रहा है.
अमेरिका की ओर से अब कोई सीधे बड़े सैन्य अभियान नहीं चलाए जा रहे हैं, इसके बजाय तेहरान की अर्थव्यवस्था को दबाव में लाने की रणनीति की जा रही है.
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं. रविवार को एक्सियोस को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की खराब होती आर्थिक स्थिति और तेजी से बढ़ती महंगाई पर नजर रख रहा है.
ट्रंप के मुताबिक ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है. उन्होंने दावा किया कि तेहरान के पास अपने सैनिकों को वेतन देने तक के लिए पर्याप्त धन नहीं है. ऐसे हालात को देखते हुए अमेरिका फिलहाल संयम बरतने और बातचीत के रास्ते को आगे बढ़ाने पर विचार कर रहा है.
ईरान की मुश्किलें उस समय और बढ़ गई हैं जब अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी ने उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है. खास तौर पर होर्मुज से होने वाला समुद्री व्यापार इस पूरे विवाद का अहम केंद्र बन गया है. अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बहाल करने को लेकर एक समझौते का प्रस्ताव सामने आया था. हालांकि, ईरान की ओर से रखी गई नई शर्तों के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी.
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहम्मद बागेर जोलकद्र ने अमेरिका से युद्ध पूरी तरह समाप्त करने, नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और अमेरिकी सैनिकों की वापसी की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने प्रतिबंध हटाने, जब्त संपत्तियों को बहाल करने और युद्ध क्षतिपूर्ति देने की शर्त भी रखी है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनोंं देशों के बीच चल रहे तनाव का सीधा असर वैश्विक व्यापार पर भी पड़ रहा है. अमेरिका ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों और व्यापारिक जहाजों से किसी भी तरह का शुल्क वसूलने के प्रयास को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल कर देता है तो ट्रंप बिना नया परमाणु समझौता किए भी सैन्य दबाव कम करने पर विचार कर सकते हैं.