नई दिल्ली: ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच डोनाल्ड ट्रंप अब अपने ही देश में बढ़ते राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं. जहां एक ओर ट्रंप ईरान में 'रिजीम चेंज' की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका में उनकी सरकार के भीतर हलचल तेज हो गई है. व्हाइट हाउस में बड़े स्तर पर फेरबदल की चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं और कई मंत्रियों की कुर्सी खतरे में बताई जा रही है.
हाल ही में अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाए जाने के बाद कैबिनेट में बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप अपनी टीम में बदलाव पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं, क्योंकि ईरान के साथ चल रही जंग अब उनके लिए घरेलू राजनीति में भारी पड़ने लगी है.
करीब पांच हफ्तों से जारी इस संघर्ष का असर अब आम अमेरिकी नागरिकों पर भी दिखने लगा है. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. हालिया सर्वे के मुताबिक ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग घटकर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो उनके कार्यकाल का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है.
व्हाइट हाउस के अंदर भी यह स्वीकार किया जा रहा है कि हालात चुनौतीपूर्ण हैं. ट्रंप का हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन भी उम्मीद के मुताबिक असर नहीं डाल सका. रिपोर्ट्स के अनुसार प्रशासन के भीतर कुछ बड़े नामों पर दबाव बढ़ रहा है. इनमें नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गैबार्ड और कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक शामिल हैं.
सूत्रों के मुताबिक ट्रंप गबार्ड के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं और उनके विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं. वहीं लुटनिक भी विवादों में घिरे हुए हैं, जिससे उनकी स्थिति कमजोर मानी जा रही है. हालांकि आधिकारिक तौर पर प्रशासन ने कहा है कि राष्ट्रपति को अपनी टीम पर पूरा भरोसा है.
ट्रंप इस बार बड़े पैमाने पर बदलाव करने से बचना चाहते हैं. उनके पहले कार्यकाल में लगातार स्टाफ बदलने को लेकर उन्हें आलोचना झेलनी पड़ी थी. इसलिए इस बार वह सीमित लेकिन असरदार बदलाव की रणनीति अपना सकते हैं.
ईरान युद्ध को लेकर जनता की राय भी ट्रंप के लिए चिंता का विषय बन गई है. लगभग 60 प्रतिशत अमेरिकी इस युद्ध के खिलाफ बताए जा रहे हैं. लोगों का मानना है कि यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है और इसका आर्थिक बोझ आम जनता को उठाना पड़ेगा.
इसके अलावा ट्रंप मीडिया कवरेज से भी नाराज बताए जा रहे हैं. उनका कहना है कि मीडिया उन्हें गलत तरीके से पेश कर रहा है और उन्होंने अपनी टीम से अधिक सकारात्मक कवरेज लाने को कहा है.