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Success Story: आईपीएस आलोक राज की कहानी, 6 बार असफल; 7वें प्रयास में 346वीं रैंक लाकर मनवाया लोहा

आईपीएस आलोक राज नारायण ने लगातार छह असफलताओं के बाद भी हिम्मत नहीं छोड़ी. सातवें प्रयास में 346वीं रैंक हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा चुनी. जानें संघर्ष, पढ़ाई और सफलता की पूरी कहानी.

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Edited By: Reepu Kumari
Success Story: आईपीएस आलोक राज की कहानी, 6 बार असफल; 7वें प्रयास में 346वीं रैंक लाकर मनवाया लोहा
Courtesy: ChatGpt

नवादा: आईपीएस आलोक राज नारायण की सफलता उन अभ्यर्थियों के लिए मिसाल है, जो असफलताओं के बाद भी लक्ष्य नहीं छोड़ते. बिहार के नवादा जिले के गांव से निकलकर उन्होंने सीमित संसाधनों में पढ़ाई की. वर्ष 2015 से संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी शुरू की. शुरुआती छह प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने मेहनत जारी रखी. वर्ष 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने 346वीं रैंक हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा में चुने गए. आलोक राज नारायण की कहानी केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है. उनके सामने आर्थिक और व्यक्तिगत स्तर पर भी कई चुनौतियां थीं. परिवार ने उनकी पढ़ाई और तैयारी में पूरा साथ दिया. उनके पिता ने बेटे की पढ़ाई के लिए जमीन तक बेच दी. करीब 15 वर्षों तक गांव से दूर रहकर तैयारी करने वाले आलोक ने असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा.

नवादा के छोटे गांव से शुरू हुआ सफर

आलोक राज नारायण बिहार के नवादा जिले के गोरिहारी गांव के रहने वाले हैं. उनका परिवार साधारण पृष्ठभूमि से आता है. उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी विद्यालय में पांचवीं कक्षा तक हुई. इसके बाद उन्होंने रोह हाई स्कूल में शिक्षा हासिल की. नौवीं कक्षा में उनका दाखिला जीवन दीप पब्लिक स्कूल में हुआ, जहां से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की. इसके बाद कोटा से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की. आगे उन्होंने दिल्ली से अभियांत्रिकी की डिग्री हासिल की. तैयारी के दौरान उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई भी की और इसी विषय को अपना वैकल्पिक विषय बनाया.

बेटे की पढ़ाई के लिए पिता ने बेची जमीन

आलोक राज की सफलता में उनके परिवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही. उनके पिता नरेश प्रसाद यादव मध्य विद्यालय नेमदारगंज से सेवानिवृत्त शिक्षक हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेटे की तैयारी में आर्थिक परेशानी न आए, इसके लिए उन्होंने जमीन तक बेच दी थी. यह जमीन नवादा शहर में मकान बनाने के उद्देश्य से खरीदी गई थी. लेकिन बेटे की पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए परिवार ने इसे बेचने का फैसला किया. इस त्याग ने आलोक को तैयारी के दौरान आर्थिक चिंता से दूर रखने में मदद की.

छह प्रयासों में मिली असफलता

आलोक राज नारायण ने वर्ष 2015 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी शुरू की. शुरुआत के छह प्रयास उनके पक्ष में नहीं रहे. लगातार असफल होने के बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी और अपनी कमियों पर काम करते रहे. उनकी यात्रा में धैर्य सबसे बड़ी ताकत बना. सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को परीक्षा में छह प्रयास और अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को नौ प्रयास मिलते हैं. आलोक ने शुरुआती छह असफलताओं के बाद भी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया.

सातवें प्रयास में बदली किस्मत

लगातार प्रयास के बाद वर्ष 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में आलोक राज नारायण ने सफलता हासिल की. उन्होंने 346वीं अखिल भारतीय रैंक प्राप्त की. यह उनके लिए लंबे संघर्ष के बाद मिली बड़ी उपलब्धि थी. करीब 15 वर्षों तक गांव से दूर रहकर लक्ष्य के लिए मेहनत करने वाले आलोक आखिरकार उस मुकाम तक पहुंचे, जिसके लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया था. उनकी कहानी बताती है कि लगातार असफलता के बावजूद तैयारी और आत्मविश्वास बनाए रखना सफलता की राह खोल सकता है.

गृह मंत्रालय में चयन के बाद मिली बड़ी सफलता

सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम आने से पहले ही आलोक राज नारायण का चयन गृह मंत्रालय के एक पद के लिए हो चुका था. उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी और 20 जून को उन्हें पद संभालना था. इसी बीच सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ और उन्हें 346वीं रैंक मिली. इसके बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा को चुना. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश संवर्ग में नियुक्ति मिली. वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र में अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं.