'कायरों हम तुम्हें याद रखेंगे', डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो देशों को क्यों लगाई लताड़
डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों को ‘कायर’ कहा, क्योंकि उन्होंने होरमुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद नहीं की. इस बीच नाटो ने बढ़ते तनाव के चलते इराक में अपनी सैन्य मौजूदगी में बदलाव किया है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर तीखा हमला करते हुए उन्हें ‘कायर’ करार दिया है. उनका आरोप है कि सहयोगी देश होरमुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के प्रस्ताव में साथ नहीं दे रहे हैं. ट्रंप ने इसे आसान सैन्य कदम बताते हुए कहा कि इससे तेल की बढ़ती कीमतों पर भी असर पड़ सकता है. इस बयान के बीच नाटो ने इराक में अपनी सैन्य तैनाती में बदलाव की पुष्टि की है, जिससे क्षेत्र में तनाव और चर्चा बढ़ गई है.
ट्रंप का तीखा बयान
NATO सहयोगियों पर नाराजगी जताते हुए ट्रंप ने कहा कि वे जिम्मेदारी निभाने से पीछे हट रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि सहयोगी देश मदद नहीं करना चाहते, जबकि यह एक आसान और कम जोखिम वाला कदम है. ट्रंप के मुताबिक, होरमुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करना जरूरी है, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है और यहां की स्थिति का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है.
इराक में नाटो की नई रणनीति
इस बीच नाटो ने पुष्टि की है कि वह इराक में अपने मिशन की स्थिति बदल रहा है. 2018 में शुरू हुआ यह मिशन बगदाद के ग्रीन जोन में संचालित होता था. अब सुरक्षा कारणों से इसकी तैनाती में बदलाव किया जा रहा है. अधिकारियों ने कहा कि यह कदम मौजूदा खतरे को देखते हुए उठाया गया है और मिशन पूरी तरह खत्म नहीं किया जा रहा है, बल्कि स्थान बदला जा रहा है.
बढ़ते तनाव का असर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण यह बदलाव जरूरी माना जा रहा है. अमेरिकी और अन्य देशों के सैनिकों की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, कई सैनिकों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है. हालांकि नाटो ने साफ किया है कि इराक के साथ उसका सहयोग जारी रहेगा और राजनीतिक संवाद भी चलता रहेगा.
वैश्विक राजनीति में नई हलचल
ट्रंप के बयान और नाटो की रणनीति में बदलाव ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. एक ओर जहां अमेरिका सहयोगियों से अधिक सक्रिय भूमिका चाहता है, वहीं दूसरी ओर सहयोगी देश जोखिम से बचने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में होरमुज जलडमरूमध्य और इराक की स्थिति आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनी रह सकती है.