अमेरिका में नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले डाक से मतदान बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है. ट्रंप प्रशासन ने इसके नियमों में बदलाव की कोशिश की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इसे लागू होने से रोक दिया. फैसले के बाद ट्रंप ने कोर्ट की खुलकर आलोचना की है.
डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को Truth Social पर लंबा पोस्ट लिखकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई. उन्होंने इसे रिपब्लिकनों के लिए बड़ा झटका बताया और आरोप लगाया कि कट्टरपंथी वामपंथी कोर्ट पर दबाव बना रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि ऐसे फैसले अमेरिका को पीछे ले जा रहे हैं. उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में नियुक्त कुछ जजों को भी निशाने पर लिया और कहा कि वे उनकी उम्मीदों के मुताबिक काम नहीं कर रहे. ट्रंप ने दावा किया कि भविष्य में यह कोर्ट देश के सबसे नुकसानदेह फैसलों के लिए याद किया जाएगा.
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन आदेश के जरिए ट्रंप प्रशासन के डाक मतदान नियमों को इस साल लागू करने की कोशिश रोक दी. कोर्ट ने विस्तृत कारण नहीं बताया. न्यायमूर्ति सैमुअल एलिटो और क्लेरेंस थॉमस ने असहमति जताई. एलिटो ने कहा कि अमेरिकी डाक सेवा के पास डाक व्यवस्था को नियंत्रित करने का अधिकार है. ब्रेट कावानाघ ने माना कि 2026 के चुनाव में नियम लागू नहीं होने चाहिए लेकिन भविष्य में उनका रुख बदल सकता है. नए नियमों में राज्यों के लिए एक जैसे लिफाफे और योग्य मतदाताओं की ऑनलाइन सूची जैसी शर्तें थीं.
ट्रंप ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट के अन्य फैसलों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने टैरिफ कार्यक्रम से जुड़े फैसले को अमेरिका के लिए महंगा बताया और दावा किया कि इससे आने वाले वर्षों में खरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है. जन्म से नागरिकता रोकने की उनकी कोशिश से जुड़े फैसले को भी उन्होंने पूरी आपदा बताया. ट्रंप ने आरोप लगाया कि कुछ जज डेमोक्रेट नेताओं के दबाव से डरते हैं और अमेरिका को बचाने के लिए जरूरी साहस नहीं दिखा रहे. वहीं, चुनाव अधिकारियों का कहना था कि मतदान से कुछ सप्ताह पहले डाक वोटिंग व्यवस्था बदलना मुश्किल होता.