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त्योहारों से पहले महंगाई का तड़का! टमाटर-प्याज के दाम दोगुने, बिगड़ा किचन बजट

त्योहारों से पहले सब्जियों की कीमतों में तेजी ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है. टमाटर 20 से 40 रुपये और प्याज 30 से 80 रुपये किलो तक पहुंच गया है, जिससे आम परिवार परेशान हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
त्योहारों से पहले महंगाई का तड़का! टमाटर-प्याज के दाम दोगुने, बिगड़ा किचन बजट
Courtesy: ai generated

त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले ही आम लोगों की रसोई पर महंगाई का दबाव बढ़ गया है. टमाटर, प्याज, अदरक और लहसुन के साथ कई हरी सब्जियों के दाम चढ़े हैं. बाजार में बढ़ती कीमतों के कारण लोग खरीदारी घटा रहे हैं और जरूरत के हिसाब से ही सब्जियां ले रहे हैं.

टमाटर-प्याज के दाम में बड़ा उछाल

सब्जी बाजार में रोजमर्रा की कई जरूरी सब्जियों की कीमत बढ़ गई है. दुकानदारों के मुताबिक टमाटर पहले करीब 20 रुपये किलो बिक रहा था, जो अब 40 रुपये तक पहुंच गया है. इसी तरह प्याज की कीमत लगभग 30 रुपये से बढ़कर 80 रुपये किलो हो गई है. अदरक और लहसुन के दाम भी बढ़ने से रसोई का खर्च बढ़ गया है.

महंगाई से बिगड़ा घरों का बजट

सब्जियों के बढ़ते दाम का असर ग्राहकों की खरीदारी पर साफ दिखाई दे रहा है. लोग दुकानदारों से कीमतों को लेकर सवाल कर रहे हैं और पहले के मुकाबले कम मात्रा में सामान खरीद रहे हैं. एक महिला ग्राहक ने बताया कि सब्जियों के अलावा दूध और दही जैसी रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हुई हैं. उनका कहना है कि इसका सबसे ज्यादा दबाव मध्यम वर्ग और सर्विस क्लास पर पड़ रहा है.

सप्लाई से जुड़ी वजहों ने बढ़ाया दबाव

ASSOCHAM के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. एसपी शर्मा के अनुसार मौजूदा महंगाई के पीछे मांग से ज्यादा सप्लाई से जुड़े कारण जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में संकट के बाद कीमतों पर दबाव बढ़ा है. उनके मुताबिक WPI महंगाई 9.8 फीसदी तक पहुंच गई है, जबकि CPI में भी बढ़ोतरी का रुझान दिख रहा है. सप्लाई संबंधी दबाव घटने पर महंगाई कम होने की उम्मीद है.

त्योहारों में और बढ़ सकती है चुनौती

आने वाले दिनों में सब्जियों की कीमतों का रुख सप्लाई और मांग की स्थिति पर निर्भर करेगा. त्योहारों के दौरान बाजार में मांग बढ़ने की संभावना है. अगर उसी समय सप्लाई पर दबाव बना रहता है, तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं. डॉ. शर्मा ने West Asia संकट पर नजर रखने की जरूरत बताई है. उन्होंने यह भी कहा कि ब्याज दरों में बदलाव का असर तुरंत नहीं दिखता, बल्कि मौद्रिक नीति का प्रभाव समय के साथ सामने आता है.