menu-icon
India Daily

'गलतफहमी में न रहें' – नए कनाडाई PM मार्क कार्नी की ट्रंप को दो-टूक चेतावनी

लिबरल पार्टी के नेतृत्व की प्रतियोगिता जनवरी में आरंभ हुई, जब जस्टिन ट्रूडो ने लगभग दस वर्षों तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने के बाद अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया. यह परिवर्तन पार्टी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है.

Ritu Sharma
Edited By: Ritu Sharma
'गलतफहमी में न रहें' – नए कनाडाई PM मार्क कार्नी की ट्रंप को दो-टूक चेतावनी
Courtesy: Social Media

Canada Vs US Relation: मार्क कार्नी ने लिबरल पार्टी के नेतृत्व की दौड़ में भारी मतों से जीत दर्ज कर कनाडा के नए प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ कर लिया है. वह जस्टिन ट्रूडो की जगह लेंगे, जिन्होंने लगभग एक दशक तक सत्ता में रहने के बाद इस्तीफा दे दिया. कार्नी, जो पहले कनाडा के सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर रह चुके हैं, अब प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे और आगामी आम चुनाव में लिबरल पार्टी का नेतृत्व करेंगे.

ट्रंप पर सीधा हमला – 'कनाडा व्यापार में भी जीतेगा'

विजय भाषण के दौरान, 59 वर्षीय कार्नी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा, ''अमेरिकियों को कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए. हॉकी की तरह, व्यापार में भी, कनाडा जीतेगा.'' ट्रंप लंबे समय से कनाडा के खिलाफ हमलावर रहे हैं और उसे अमेरिका का 51वां राज्य कहने से नहीं चूके.

व्यापार युद्ध और टैरिफ को लेकर दो टूक

अमेरिका ने कनाडा से आयातित उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाए थे, हालांकि बाद में कुछ टैरिफ हटा लिए गए. जवाब में कनाडा ने भी कड़े कदम उठाए. कार्नी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार "जब तक अमेरिका सम्मान नहीं देगा, तब तक टैरिफ जारी रखेगी."

'कनाडा कभी अमेरिका का हिस्सा नहीं होगा'

ट्रंप के 51वें राज्य वाले दावे पर कार्नी ने कड़ा जवाब देते हुए कहा, ''कनाडा कभी भी किसी भी तरह से अमेरिका का हिस्सा नहीं होगा.'' उन्होंने आगे जोड़ा, ''अमेरिका हमारे संसाधन, हमारा पानी, हमारी ज़मीन चाहता है, लेकिन हम अब उन पर भरोसा नहीं कर सकते.''

ट्रूडो की विदाई और कनाडा की चुनौतियां

हालांकि, पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो ने अपने विदाई भाषण में कनाडा के सामने बढ़ते आर्थिक संकट और अमेरिका से उत्पन्न अस्तित्व संबंधी चुनौतियों की चेतावनी दी. आवास संकट और जीवन यापन की बढ़ती लागत के चलते उनकी लोकप्रियता गिरती जा रही थी, जिसके कारण उन्हें पद छोड़ने का दबाव झेलना पड़ा.