नई दिल्ली: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट गहराता जा रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित है, जिससे कई देशों में तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है. इसी बीच 30 से ज्यादा देशों ने मिलकर इस मार्ग को दोबारा खुलवाने की तैयारी तेज कर दी है. लंदन में शुरू हुई अहम बैठक को वैश्विक रणनीतिक कदम माना जा रहा है.
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय की अगुवाई में लंदन में सैन्य योजनाकारों की बैठक शुरू हुई है. इसमें 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. बैठक का मुख्य उद्देश्य ऐसी संयुक्त सैन्य रणनीति तैयार करना है, जिससे हालात सामान्य होने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित ढंग से फिर शुरू कराई जा सके. इसे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी कदम माना जा रहा है.
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने कहा है कि अब तक बनी अंतरराष्ट्रीय सहमति को जमीन पर उतारने का समय आ गया है. उनका कहना है कि इस योजना का मकसद समुद्री मार्ग में नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना और स्थायी युद्धविराम को समर्थन देना है. बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और संयुक्त संचालन पर विस्तार से चर्चा हो रही है.
अधिकारियों के अनुसार बैठक में कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, सैन्य क्षमताओं और क्षेत्र में संभावित तैनाती पर विचार किया जाएगा. हालांकि यह साफ किया गया है कि मिशन तभी लागू होगा, जब क्षेत्र में स्थायी युद्धविराम प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा. फिलहाल सभी देश किसी जल्दबाजी के बजाय समन्वित और सुरक्षित रणनीति पर जोर दे रहे हैं.
इस प्रस्तावित मिशन की कमान ब्रिटेन और फ्रांस संभाल रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पहले ही एक दर्जन से ज्यादा देश इसमें शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं. पिछले सप्ताह यूरोप, एशिया और मिडल ईस्ट के करीब 50 देशों ने वर्चुअल बैठक में भाग लिया था. इससे साफ है कि होर्मुज संकट अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक चिंता बन चुका है.
अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने का ऐलान जरूर किया है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपनी नाकेबंदी हटाने की घोषणा नहीं की है. दूसरी ओर ईरान भी इस मार्ग को लेकर सख्त रुख बनाए हुए है. ऐसे में समुद्री तनाव बना हुआ है और दुनिया की नजर अब लंदन बैठक से निकलने वाले फैसलों पर टिकी है.