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India Daily

चीन को घेरने का बड़ा प्लान! 50 देशों का मिनरल ब्लॉक बना रहा अमेरिका, भारत की एंट्री से बदलेगा गेम?

चीन के दबदबे को चुनौती देने के लिए अमेरिका 50 देशों का क्रिटिकल मिनरल्स ब्लॉक बनाने की तैयारी कर रहा है. इस पहल से वैश्विक सप्लाई चेन बदलेगी और भारत के लिए नए रणनीतिक अवसर खुलने के रास्ते भी साफ होंगे.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
चीन को घेरने का बड़ा प्लान! 50 देशों का मिनरल ब्लॉक बना रहा अमेरिका, भारत की एंट्री से बदलेगा गेम?
Courtesy: social media

नई दिल्ली: चीन के वर्चस्व वाली क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए अमेरिका ने एक बड़ा दांव खेल दिया है. वॉशिंगटन में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ में अमेरिका ने करीब 50 देशों को साथ लेकर एक नया ट्रेडिंग ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव रख दिया है. इसका मकसद लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ जैसे अहम खनिजों की सप्लाई सुरक्षित करना और कीमतों में स्टेबिलिटी लाना है. यह पहल वैश्विक राजनीति और भारत की औद्योगिक रणनीति दोनों पर असर डाल सकती है.

क्या है अमेरिका की नई रणनीति

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट कहा कि चीन की कीमत गिराने की नीति से निपटने के लिए न्यूनतम मूल्य यानी ‘प्राइस फ्लोर’ तय करना बहुत जरूरी है. प्रस्तावित ब्लॉक में शामिल सभी देश आपस में सुरक्षित व्यापार करेंगे. अमेरिका का मानना है कि इससे घरेलू उद्योग और मित्र देशों के उत्पादक सुरक्षित रहेंगे तथा खनिजों की आपूर्ति किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगी.

चीन के दबदबे से क्यों है चिंता

चीन दुनिया की लगभग 70 प्रतिशत रेयर अर्थ माइनिंग और 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग को नियंत्रित करता है. स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और रक्षा तकनीक के लिए ये खनिज अनिवार्य हैं. चीन कई बार राजनीतिक तनाव के दौरान निर्यात रोक देता है या कीमतें गिराकर प्रतिस्पर्धा खत्म कर देता है, जिससे अन्य देशों की परियोजनाएं घाटे में चली जाती हैं. चीन के इसी वर्चस्व को खत्म करने के लिए अमेरिका ने ये प्लान तैयार किया है.

दुनिया पर क्या असर पड़ेगा

इस प्रस्तावित ब्लॉक से वैश्विक सप्लाई चेन ‘डी-रिस्क’ होगी. अगर चीन सप्लाई बाधित करता है, तो सदस्य देश एक-दूसरे की मदद कर सकेंगे. अमेरिका पहले ही 10 अरब डॉलर के सरकारी ऋण और निजी निवेश से रणनीतिक भंडार बनाने की घोषणा कर चुका है. इससे खनिज बाजार में स्थिरता आएगी और भविष्य की तकनीकों पर चीन का एकाधिकार कमजोर होगा.

भारत के लिए क्यों अहम है यह पहल

भारत इस बैठक में सक्रिय रूप से शामिल रहा है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी जोर दिया. भारत में लिथियम और कॉपर के भंडार मिल रहे हैं. इस ब्लॉक से भारत को अमेरिकी तकनीक, निवेश और प्रोसेसिंग क्षमता मिल सकती है. इससे चिप निर्माण, ईवी और रक्षा क्षेत्र में चीन पर निर्भरता घटेगी और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका निभा सकेगा.