नई दिल्ली: दक्षिणी चीन से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां झाड़ फूंक जैसे अंधविश्वासी अनुष्ठान के दौरान एक युवती की जान चली गई. यह मामला ग्वांगडोंग प्रांत के शेन्जेन से जुड़ा है. यहां की एक कोर्ट ने बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार मां और उसकी बड़ी बेटी को सस्पेंडेड जेल की सजा सुनाई है. अधिकारियों के मुताबिक यह मौत जानबूझकर नहीं हुई, लेकिन लापरवाही के कारण एक परिवार को अपूरणीय नुकसान झेलना पड़ा.
स्थानीय कोर्ट ने जुलाई में इस मामले में फैसला सुनाया. महिला जिसका उपनाम ली बताया गया है, उसे चार साल की सजा सुनाई गई, जिसे तीन साल के लिए सस्पेंड कर दिया गया. यानी अगर इस अवधि में उसने कोई और अपराध नहीं किया तो उसे जेल नहीं जाना होगा. इसी तरह उसकी बड़ी बेटी को भी समान सजा दी गई. कोर्ट ने दोनों को लापरवाही से हत्या का दोषी माना.
प्रॉसिक्यूटर के अनुसार ली और उसकी दोनों बेटियां टेलीपैथी भूत प्रेत और आत्माओं से जुड़ी अंधविश्वासी मान्यताओं में गहराई से विश्वास रखती थीं. उन्हें लगता था कि उन पर शैतानी ताकतों का हमला हो रहा है और उनकी आत्माएं बिक चुकी हैं. यह विश्वास धीरे धीरे उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन गया और इसी ने इस त्रासदी की नींव रखी.
घटना पिछले साल दिसंबर की बताई गई है. परिवार की छोटी बेटी जिसका सरनेम शी था, ने अचानक कहा कि उस पर भूत सवार हो गया है. उसने अपनी मां और बड़ी बहन से कहा कि उस पर झाड़ फूंक की जाए. मां और बहन को यकीन था कि वे उसकी मदद कर रही हैं. अनुष्ठान के दौरान उन्होंने युवती की छाती पर जोर डाला और उल्टी करवाने के लिए उसके गले में पानी डाला.
अनुष्ठान के दौरान एक समय पर छोटी बेटी ने कहा कि झाड़ फूंक असर दिखा रही है और इसे जारी रखना चाहिए. इसके बाद भी यह प्रक्रिया चलती रही. लेकिन अगली सुबह परिवार के दूसरे सदस्यों ने उसे बेहोश अवस्था में पाया. उसके मुंह से खून निकल रहा था. घबराकर उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंचे मेडिकल कर्मियों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
पुलिस जांच में यह साफ हुआ कि युवती की मौत किसी बीमारी से नहीं बल्कि शारीरिक दबाव और जबरन कराए गए अनुष्ठान की वजह से हुई. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मां और बहन का इरादा बेटी को मारने का नहीं था. वे यह मान रही थीं कि वे उसकी मदद कर रही हैं. लेकिन उनके कृत्यों की वजह से ही उसकी मौत हुई, जिसे लापरवाही माना गया.
कोर्ट ने सजा सुनाते समय कई पहलुओं को ध्यान में रखा. अधिकारियों के साथ आरोपी महिलाओं का सहयोग. उनका पछतावा. और यह तथ्य कि उन्होंने जानबूझकर हत्या नहीं की. इन्हीं कारणों से कोर्ट ने सस्पेंडेड सजा का विकल्प चुना. हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंधविश्वास के नाम पर की गई लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.