menu-icon
India Daily

'RSS कोई पैरामिलिट्री संगठन नहीं है, इसे BJP के नजरिए से न देखें...', झूठे नैरेटिव के खिलाफ मोहन भागवत ने कहा

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ न तो पैरामिलिट्री संगठन है और न ही बीजेपी की शाखा. उन्होंने लोगों से अपील की कि संघ को उसके काम और उद्देश्य के आधार पर समझें.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
'RSS कोई पैरामिलिट्री संगठन नहीं है, इसे BJP के नजरिए से न देखें...', झूठे नैरेटिव के खिलाफ मोहन भागवत ने कहा
Courtesy: @rajeshpadmar X account

नई दिल्ली: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ न तो कोई पैरामिलिट्री संगठन है और न ही उसे भारतीय जनता पार्टी के नजरिये से समझना सही है. उन्होंने कहा कि संघ के बारे में कई गलत धारणाएं और झूठे नैरेटिव फैलाए जा रहे हैं, जिनसे लोगों को बचना चाहिए. भागवत ने कहा कि संघ को उसके काम और उद्देश्य के आधार पर समझा जाना चाहिए.

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक भले ही एक जैसी वर्दी पहनते हों, मार्च करते हों और दंड अभ्यास करते हों, लेकिन इससे यह मान लेना कि यह कोई पैरामिलिट्री संगठन है, पूरी तरह गलत होगा. उन्होंने कहा कि संघ एक अनोखा संगठन है.

भागवत ने RSS और BJP को लेकर क्या बताया?

भागवत ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति संघ को बीजेपी के चश्मे से देखने की कोशिश करता है, तो वह बड़ी भूल करेगा. उन्होंने कहा कि यही गलती तब भी होगी, जब कोई संघ को विद्या भारती जैसे उससे जुड़े संगठनों के आधार पर समझने की कोशिश करेगा. उन्होंने माना कि आरएसएस को जनसंघ और उसके उत्तराधिकारी के रूप में बीजेपी का मार्गदर्शक संगठन माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों एक ही हैं.

RSS प्रमुख ने बताया संघ का असली स्वरूप

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आज के दौर में लोग सही जानकारी तक पहुंचने के लिए गहराई में नहीं जाते. उन्होंने कहा कि लोग विकिपीडिया जैसे स्रोतों पर भरोसा कर लेते हैं, जहां हर जानकारी सही नहीं होती. भागवत ने कहा कि जो लोग विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेते हैं, वही संघ के असली स्वरूप को समझ पाते हैं.
भागवत ने यह भी कहा कि संघ का जन्म किसी के विरोध या प्रतिक्रिया के रूप में नहीं हुआ था. 

उन्होंने कहा कि संघ न तो किसी से प्रतिस्पर्धा करता है और न ही किसी के खिलाफ खड़ा है. संघ का उद्देश्य समाज को एकजुट करना और उसमें ऐसे गुण और संस्कार विकसित करना है, जिससे देश दोबारा किसी बाहरी शक्ति के अधीन न हो.

इतिहास का जिक्र करते हुए क्या बताया?

इतिहास का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि भारत पर आक्रमण अंग्रेजों से पहले भी कई बार हुए. उन्होंने कहा कि कई बार दूर देशों से आए लोग, जो भारतीयों से कमजोर थे, फिर भी देश को पराजित करने में सफल रहे. उन्होंने कहा कि आजादी को सुरक्षित रखने के लिए समाज को आत्ममंथन करना होगा और स्वार्थ से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा.

भागवत ने कहा कि संघ की आर्थिक स्थिति अब मजबूत है और यह किसी बाहरी फंड या दान पर निर्भर नहीं है. उन्होंने लोगों से अपील की कि संघ को समझने के लिए उसकी शाखाओं में जाकर खुद अनुभव करें.