चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग जिस विमान से भारत आए, उसकी ताकत जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान
शी जिनपिंग की विदेश यात्राओं में इस्तेमाल होने वाला विमान बोइंग 747-8 आधारित विशेष VIP विमान है. यह मूल रूप से एयरलाइन मॉडल पर आधारित है.
नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं. उनके भारत दौरे के साथ ही उनके खास विमान की भी चर्चा हो रही है. कई बार इसे बोइंग 787-8 बताया जाता है, लेकिन चीन राष्ट्रपति स्तर की यात्राओं के लिए मुख्य रूप से बोइंग 747-8 आधारित विशेष विमान का इस्तेमाल करता है. यह विमान बाहर से सामान्य यात्री विमान जैसा दिखाई देता है, लेकिन इसके अंदर कई खास बदलाव किए गए हैं.
चीन का यह विमान एयर चाइना के बेड़े से जुड़ा है और इसे राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए विशेष VIP कॉन्फिगरेशन में तैयार किया गया है. विमान का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार किया जाता है. अमेरिका के एयर फोर्स वन की तरह चीन के पास राष्ट्रपति के लिए हमेशा अलग से समर्पित विमान रखने की व्यवस्था नहीं है. यही चीन के मॉडल की सबसे बड़ी खासियतों में से एक है.
747-8 कितना शक्तिशाली है?
बोइंग 747-8 दुनिया के सबसे बड़े यात्री विमानों में शामिल है. इसकी लंबाई करीब 76 मीटर और पंखों का फैलाव करीब 68 मीटर है. इसमें चार इंजन होते हैं और यह करीब 900 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है. इसकी अंतरमहाद्वीपीय रेंज 14 हजार किलोमीटर से ज्यादा हो सकती है.
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इसकी बड़ी रेंज की वजह से लंबी दूरी की यात्राएं बिना बार-बार ईंधन भरने की जरूरत के पूरी की जा सकती हैं. सामान्य यात्री विमान की तुलना में राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल होने वाले विमान में सीटों की संख्या कम रखी जाती है और जगह का इस्तेमाल अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों तथा आवश्यक स्टाफ के लिए किया जाता है.
अंदर क्या-क्या सुविधाएं होती हैं?
राष्ट्रपति स्तर के VIP विमान का अंदरूनी हिस्सा सामान्य एयरलाइन विमान से काफी अलग होता है. इसमें निजी कक्ष, बैठक के लिए जगह, कार्यालय, आराम करने की सुविधा और आधुनिक संचार प्रणालियां शामिल हो सकती हैं.
सबसे महत्वपूर्ण सुविधा सुरक्षित संचार व्यवस्था होती है. इसके जरिए राष्ट्रपति यात्रा के दौरान अधिकारियों और सरकार से संपर्क बनाए रख सकते हैं. इस वजह से ऐसे विमानों को केवल यात्री विमान नहीं बल्कि उड़ते हुए कमांड सेंटर के तौर पर भी देखा जाता है.
सुरक्षा कितनी मजबूत होती है?
राष्ट्राध्यक्ष के विमान में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है. ऐसे विमानों में सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड संचार, आधुनिक नेविगेशन तथा खतरे का पता लगाने वाली तकनीक जैसी व्यवस्थाएं होने की जानकारी सामने आती रही है. हालांकि चीन के राष्ट्रपति विमान की वास्तविक सुरक्षा प्रणालियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है.
यही वजह है कि मिसाइल डिफेंस, जैमिंग या इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसी क्षमताओं को लेकर किए जाने वाले कई दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है. राष्ट्रपति विमान की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी आम तौर पर सार्वजनिक नहीं की जाती.
एयर फोर्स वन से कितना अलग?
अमेरिकी राष्ट्रपति का एयर फोर्स वन वर्तमान में बोइंग 747 आधारित VC-25A विमान है. अमेरिका ने इसके उत्तराधिकारी के तौर पर 747-8 आधारित नए VC-25B विमान भी तैयार किए हैं. एयर फोर्स वन में राष्ट्रपति कार्यालय, कॉन्फ्रेंस रूम, मेडिकल सुविधा और सुरक्षित संचार जैसी विशेष व्यवस्थाएं हैं.
चीन का मॉडल इससे अलग है. चीन एयर चाइना के विमान को जरूरत के अनुसार VIP भूमिका में इस्तेमाल करता है, जबकि अमेरिका के पास राष्ट्रपति के लिए समर्पित विमान हैं.
रूस और भारत से तुलना
रूस के राष्ट्रपति का विमान इल्यूशिन IL-96-300 आधारित विशेष विमान है. इसमें भी सुरक्षित संचार और कमांड सुविधाओं के साथ राष्ट्रपति के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. भारत के प्रधानमंत्री के लिए इस्तेमाल होने वाला एयर इंडिया वन बोइंग 777-300ER पर आधारित है और इसका संचालन भारतीय वायुसेना करती है. इसमें भी सुरक्षा, सुरक्षित संचार और VIP यात्रा के लिए विशेष सुविधाएं मौजूद हैं.
इस तरह चीन, अमेरिका, रूस और भारत ने अपनी जरूरतों और रणनीति के अनुसार अलग-अलग मॉडल अपनाए हैं. शी जिनपिंग का बोइंग 747-8 आधारित विमान अपने विशाल आकार, लंबी दूरी और VIP कॉन्फिगरेशन की वजह से बेहद खास है. यह सिर्फ राष्ट्रपति को एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाने वाला विमान नहीं बल्कि यात्रा के दौरान भी उच्चस्तरीय सरकारी कामकाज को जारी रखने का माध्यम है.