क्या IMF को चुनौती देने की है तैयारी! जानें BRICS बैंक से भारत को कितना मिलता है फायदा
BRICS का न्यू डेवलपमेंट बैंक विकासशील देशों की बुनियादी ढांचा और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराता है.
नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन होने के साथ न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी NDB भी चर्चा में है. BRICS देशों ने इस बैंक की स्थापना विकासशील देशों की बुनियादी ढांचा और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह बैंक भविष्य में IMF को चुनौती दे सकता है और भारत को इससे कितना फायदा मिल रहा है.
न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना 2015 में BRICS देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर की थी. इसका मुख्यालय चीन के शंघाई में है. बैंक का मुख्य उद्देश्य विकासशील देशों में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, बिजली, जल प्रबंधन, डिजिटल नेटवर्क और स्वच्छ ऊर्जा जैसी परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देना है.
क्यों पड़ी NDB की जरूरत?
NDB की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि विश्व बैंक और IMF जैसे वैश्विक वित्तीय संस्थानों में पश्चिमी देशों का प्रभाव लंबे समय से अधिक रहा है. विकासशील देशों का मानना था कि उन्हें उनकी आर्थिक क्षमता और आबादी के अनुरूप पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता. ऐसे में BRICS देशों ने अपने लिए एक अतिरिक्त वित्तीय विकल्प तैयार किया.
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हालांकि NDB का मकसद IMF या विश्व बैंक को खत्म करना नहीं है. यह मुख्य रूप से विकास परियोजनाओं के लिए लंबी अवधि का कर्ज उपलब्ध कराता है. बैंक स्थानीय मुद्रा में वित्त उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करता है, जिससे डॉलर आधारित कर्ज से जुड़ा विदेशी मुद्रा जोखिम कम किया जा सकता है.
भारत को कितना फायदा?
भारत NDB का संस्थापक सदस्य है और बैंक में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. देश में सड़क, रेलवे, मेट्रो, बंदरगाह, जल प्रबंधन और शहरी विकास जैसी परियोजनाओं के लिए बड़े निवेश की जरूरत है. NDB से मिलने वाला वित्त इन क्षेत्रों में परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है.
कर्ज की सुविधा
भारत के लिए स्थानीय मुद्रा में कर्ज की सुविधा भी महत्वपूर्ण हो सकती है. डॉलर में लिया गया कर्ज रुपये की कीमत कमजोर होने पर महंगा हो जाता है. स्थानीय मुद्रा में वित्त मिलने से इस जोखिम को कम किया जा सकता है, हालांकि यह सुविधा हर परियोजना में समान रूप से उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है.
NDB भारत को वित्तीय विकल्पों में विविधता भी देता है. इससे भारत अपनी विकास परियोजनाओं के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से धन जुटा सकता है और अपनी जरूरत के हिसाब से बेहतर विकल्प चुन सकता है.
NDB और IMF में क्या अंतर?
NDB और IMF दोनों अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान हैं, लेकिन दोनों का काम अलग है. IMF मुख्य रूप से देशों को आर्थिक और वित्तीय संकट से उबरने में सहायता करता है. अगर किसी देश के पास विदेशी मुद्रा की कमी हो या वह बाहरी भुगतान करने में परेशानी में हो, तो IMF वित्तीय सहायता दे सकता है.
IMF कर्ज देते समय किसी देश की व्यापक आर्थिक नीतियों पर भी जोर दे सकता है. इसके तहत बजट घाटा कम करने या आर्थिक सुधारों जैसे कदमों पर जोर दिया जा सकता है. NDB का ध्यान मुख्य रूप से संबंधित परियोजना और उसके विकासात्मक परिणामों पर रहता है.
क्या NDB IMF का विकल्प बन सकता है?
फिलहाल NDB को IMF का सीधा विकल्प कहना सही नहीं होगा. दोनों संस्थानों की भूमिका अलग है. IMF वैश्विक आर्थिक संकट और भुगतान संतुलन जैसी समस्याओं से निपटने में विशेषज्ञ भूमिका निभाता है, जबकि NDB विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराता है.