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पाकिस्तान की ज्यूडिशरी स‍िस्‍टम पर बड़ा संकट! आखिर क्यों एक के बाद एक सुप्रीम कोर्ट के जज दे रहें हैं इस्तीफा?

Pakistan Judiciary: पाकिस्तान की न्यायपालिका पर अचानक से बड़ा संकट मंडराता हुआ दिखाई दे रहा है. महज 2 दिन के भीतर सुप्रीम कोर्ट के दो बड़े जजों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

Manish Pandey

Pakistan: पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर संकटों से घिरे पाकिस्तान में अब एक और संकट गहराता हुआ नजर आ रहा है. पाकिस्तान की ज्यूडिशरी स‍िस्‍टम में उस समय अचानक भूचाल आ गया जब सिर्फ 2 दिनों के अंदर ही पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के दो बड़े जजों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. पाकिस्तान ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर तब खींचा जब गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस इजाजुल अहसान ने इस्तीफा दिया. खास बात ये है कि जस्टिस इजाजुल अहसान के इस्तीफे से महज एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य जज जस्टिस सैयद मजहर अली अकबर नकवी ने भी इस्तीफा दिया था.

गुरुवार को अपना इस्तीफा देने वाले जस्टिस इजाजुल अहसान पाकिस्तान के अगले चीफ जस्टिस बनने वाले थे. ऐसे में उनके इस्तीफे से पाकिस्तान की ज्यूडिशरी स‍िस्‍टम को लेकर बड़े सवाल खड़े होते हैं.

जस्टिम नकवी पर गैर जिम्मेदाराना व्यवहार का आरोप 

बता दें, जस्टिस अहसान से पहले इस्तीफा देने वाले जस्टिम नकवी पर गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के मामले में जांच चल रही है. उन पर कदाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. इसी मामले की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जस्टिस अहसान ने राष्ट्रपति डॉ. आरिफ अल्वी को अपना लिखित इस्तीफा सौंप दिया. उन्होंने इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि 'उनके लिए इस पद पर बने रहना अब संभव नहीं है.'

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा घटनाक्रम कदाचार के आरोपों का सामना कर रहे जस्टिस नकवी की जांच से जुड़ा है. जस्टिस नकवी पर ज्यूडिशियल काउंसिल में कार्यवाही चल रही है, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद मंगलवार को जस्टिस अहसान ने जस्टिस नकवी के खिलाफ दायर शिकायतों पर ज्यूडिशियल काउंसिल की कार्यवाही के तरीके पर आपत्ति जताई थी. इसके साथ ही उन्होंने 22 नवंबर को जस्टिस नकवी को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को वापस लेने की भी अपील की थी. उन्होंने इस संबंध में अपनी 4 पन्नों की राय जारी की थी, जिसमें उन्होंने बताया था  कि वह नकवी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बहुमत के फैसले से असहमत क्यों थे?

जस्टिस अहसान ने ज्यूडिशियल काउंसिल के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जस्टिस नकवी को दूसरा नोटिस जारी किया गया था, तब ये प्रक्रिया पूरी तरह से किसी भी चर्चा या विचार-विमर्श से रहित थी. उन्होंने आगे कहा क‍ि इस तरह की कार्यवाही ने पूरी प्रक्रिया पर एक अवांछित संदेह पैदा कर दिया है. बता दें, पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठतम न्यायाधीश इजाजुल अहसान उस पांच सदस्यीय पीठ का हिस्सा थे, जिसने 2017 में पनामाकोट मामले में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अयोग्य ठहराया था.