चीन की नापाक चाल पर चला लंका का चाबुक, फड़फड़ा रहा 'ड्रैगन' कर रहा ये मांग

China Research Vessel: चीन ने पिछले महीने अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र में शोध जहाजों पर एक साल के लिए रोक लगा दी थी. कोलंबो के इस कदम पर चीन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

India Daily Live

China Research Vessel: श्रीलंकाई सरकार ने बीते दिनों हिंद महासागर क्षेत्र में रिसर्चर जहाजों पर एक साल के लिए रोक लगा दी. कोलंबो के इस फैसले से चीन की नींद उड़ गई है. चीन सरकार कोशिश कर रही है कि किसी तरह श्रीलंका अपने विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के अंदर होने वाले विदेशी शोध जहाजों पर लगाई गई एक साल की रोक वापस ले ले. कोलंबो ने यह प्रतिबंध इस साल की शुरुआत यानी 3 जनवरी को लगाए थे. चीन का यह कदम बीजिंग के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. वहीं, भारत के लिए इसे रियायत के तौर पर समझा रहा है. यह सारा घटनाक्रम चीन के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है और किसी तरह से चाह रहा है कि श्रीलंकाई सरकार अपना फैसला वापस ले ले. 

श्रीलंका ने 31 दिसंबर 2023 को भारत को अपने इस निर्णय के बारे में जानकारी दी थी. जुलाई 2023 में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह के बाद श्रीलंकाई सरकार ने यह निर्णय लिया था. पीएम मोदी ने श्रीलंकाई प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के सामने भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की बात कही थी. पिछले साल के अंतिम महीने चीन सरकार के अनुसंधान पोत जियांग यांग होंग 3 को रुकने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था. 

श्रीलंका का यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र की जटिल भू-राजनीतिक गतिशीलता को सामने लाता है. कोलंबो के इस कदम पर चीन ने प्रक्रिया दी है और सकारात्मक संबंधघ बनाए रखने की बात दोहराई है. हालांकि, श्रीलंका के इस निर्णय ने कई स्तरों पर बीजिंग की चिंताओं में वृद्धि की है. चीन के अनुसंधान वाले जहाज वैज्ञानिक और रणनीतिक स्तर समुद्र की मैपिंग करते हैं. यह रोक बीजिंग को जरूरी डेटा से पहुंच को बाधित करती है. दूसरा इसका अहम प्रभाव क्षेत्रीय है. इस बैन को भारत के लिहाज से महत्वपूर्ण समझा जा सकता है. श्रीलंका आर्थिक आपातकाल के बाद भारत के बेहद करीब आया है. यह सभी तथ्य क्षेत्र में चीन की रणनीतिक पहुंच को सीमित करते हैं.

कोलंबो के इस प्रतिबंध से चीन द्वारा चलाई जा रही परियोजनाओं में देरी आ सकती है. चीन पर्दे के पीछे से प्रतिबंधों पर कम छूट की मांग कर सकता है. बीजिंग श्रीलंका के इस कदम को दोनों देशों के बीच संबंधों में टकराव के तौर पर भी देख सकता है. बीजिंग हिंद महासाहर के अन्य देशों के साथ पहुंच और सहयोग के नए अवसरों को भी तलाश सकता है.