IPL 2026 US Israel Iran War Weather IMD

मधुमक्खियों से अकेली भिड़ीं बहादुर आंगनवाड़ी की कुक, 20 बच्चों को बचाया; खुद चढ़ीं हजारों डंक की भेंट

नीमच जिले के रनपुर गांव में आंगनवाड़ी कुक कंचन बाई मेघवाल ने मधुमक्खियों के हमले से 20 बच्चों की जान बचाई. इस घटना में सैकड़ों मधुमक्खियों के डंक लगने से उनकी मौत हो गई और पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है.

Grok AI
Km Jaya

नीमच: मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रणपुर गांव में एक आंगनवाड़ी कुक ने हिम्मत दिखाते हुए लगभग 20 बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान दे दी. यह घटना माडावाडा पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र में हुई, जब कंपाउंड में खेल रहे बच्चों पर अचानक मधुमक्खियों का एक बड़ा झुंड आ गया. 

उसी समय केंद्र की कुक कंचन बाई मेघवाल ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना पास पड़े तिरपाल और चटाई उठा लिए. एक-एक करके उन्होंने बच्चों को उनमें लपेटा और अपने शरीर से उन्हें बचाया फिर उन्हें केंद्र के अंदर ले गईं. जब वह मधुमक्खियों और बच्चों के बीच खड़ी थीं तब झुंड उन पर हमला कर दिया.

कैसे हुई कंचन बाई की मौत?

सैकड़ों मधुमक्खियों ने उन्हें डंक मारा. फिर भी जब तक आखिरी बच्चा सुरक्षित नहीं हो गया, वह पीछे नहीं हटीं. जब तक गांव वाले मदद के लिए पहुंचे, कंचन बाई बेहोश हो चुकी थीं. कांस्टेबल कालूनाथ और पायलट राजेश राठौर उन्हें कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ले गए लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें वहां पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया. उनके शरीर पर अनगिनत मधुमक्खियों के डंक के निशान थे, जो उनकी बहादुरी का सबूत था.

कंचन बाई के परिवार में कौन-कैन है?

कंचन बाई सिर्फ एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से कहीं ज्यादा थीं. वह गांव के बच्चों के लिए दोपहर का खाना बनाती थीं, जय माता दी सेल्फ-हेल्प ग्रुप की अध्यक्ष थीं और अपने परिवार का एकमात्र सहारा थीं. उनके पति, शिवलाल, लकवाग्रस्त हैं. उनके पीछे एक बेटा और दो बेटियां हैं.

मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद जब उनका शव रणपुर गांव पहुंचा, तो गांव में मातम छा गया. उस महिला को सलाम कर रहे थे जिसकी हिम्मत को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.

गांव में अभी भी क्यों है डर का माहौल?

गांव में अभी भी डर का माहौल है. आंगनवाड़ी केंद्र के पास एक पेड़ पर मधुमक्खियों का एक बड़ा छत्ता लटका हुआ है, उसी जगह पर जहां गांव का एकमात्र हैंडपंप है. निवासी दूसरे हमले के डर से पानी लाना बंद कर दिया है. गांव वाले मधुमक्खियों के छत्ते को तुरंत हटाने और कंचन बाई के शोक संतप्त परिवार के लिए वित्तीय सहायता की मांग कर रहे हैं.