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यूनुस की 'मनमानी' पर तारिक रहमान ने लगाया ब्रेक! बांग्लादेश का संविधान बदलने से BNP ने किया इनकार

बांग्लादेश में नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले ही सियासी घमासान मच गया है. तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी ने मोहम्मद यूनुस के 'संविधान सुधार परिषद' के प्रस्ताव को ठुकराते हुए संविधान बदलने से साफ इनकार कर दिया है.

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यूनुस की 'मनमानी' पर तारिक रहमान ने लगाया ब्रेक! बांग्लादेश का संविधान बदलने से BNP ने किया इनकार
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: पड़ोसी देश बांग्लादेश में नई सत्ता के आगाज से पहले ही संवैधानिक संकट के बादल मंडराने लगे हैं. तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें नवनिर्वाचित सांसदों को 'कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल' के सदस्य के रूप में शपथ पत्र पर दस्तखत करने को कहा गया था. बीएनपी का यह कड़ा रुख यूनुस की उन कोशिशों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिसके जरिए वे संविधान में बदलाव करना चाहते थे.

सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में ही बीएनपी ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी. पार्टी नेता सलाउद्दीन अहमद ने तारिक रहमान की मौजूदगी में कहा कि नवनिर्वाचित सांसदों को रिफॉर्म काउंसिल के फॉर्म पर साइन करने की कोई जरूरत नहीं है. बीएनपी का तर्क है कि उनके सांसद जनता द्वारा काउंसिल के सदस्य के रूप में नहीं चुने गए हैं. सलाउद्दीन अहमद ने इसे एक मनमाना फैसला करार देते हुए कहा कि पार्टी प्रमुख के निर्देशानुसार कोई भी सांसद इस रिफॉर्म काउंसिल का हिस्सा नहीं बनेगा. 

संविधान सुधार परिषद पर कानूनी सवाल 

सलाउद्दीन अहमद ने मीडिया के सामने स्थिति साफ करते हुए कहा कि मौजूदा संविधान में 'कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल' का कोई स्थान ही नहीं है. उनके अनुसार, किसी भी काउंसिल को पहले जनमत संग्रह के नतीजों के आधार पर संवैधानिक दर्जा दिया जाना चाहिए. इसके अलावा, उन्होंने शपथ दिलाने वाली प्रक्रिया और काउंसिल के संचालन से जुड़े विधिक नियमों की कमी की ओर भी इशारा किया. बीएनपी का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर केवल संसद के भीतर ही गहन चर्चा होनी चाहिए.

केवल सांसद के तौर पर ली शपथ 

भारी गहमागहमी के बीच बीएनपी के सांसदों ने रिफॉर्म काउंसिल का हिस्सा बनने के बजाय केवल बांग्लादेश संसद के सदस्य के तौर पर शपथ ली. पार्टी का रुख स्पष्ट था कि जो नियम वर्तमान संविधान का हिस्सा नहीं हैं, उन्हें जबरन स्वीकार नहीं किया जा सकता. सांसदों ने इस बात पर जोर दिया कि संवैधानिक सुधारों की रूपरेखा संसद में ही तय की जानी चाहिए, किसी बाहरी परिषद या संदिग्ध प्रक्रिया के माध्यम से नहीं. यह निर्णय यूनुस सरकार के लिए बड़ी चुनौती है.

तारिक रहमान का परिवार के साथ प्रवेश 

इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जाइमा रहमान के साथ सुबह करीब 10:28 बजे शपथ ग्रहण कक्ष में पहुंचे. उनकी मौजूदगी ने नवनिर्वाचित सांसदों का उत्साह बढ़ा दिया. समारोह के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनावों में जीत हासिल करने वाले सभी सांसदों को औपचारिक शपथ दिलाई. 

संवैधानिक ढांचे पर खींचतान बरकरार 

बीएनपी द्वारा उठाए गए इस कदम ने अंतरिम सरकार के उस कदम को बड़ा झटका दिया है, जिसके तहत वह पार्लियामेंट चुनावों के साथ हुए रेफरेंडम के हिसाब से संविधान बदलना चाह रही थी.जहां यूनुस सरकार नए ढांचे पर जोर दे रही है, वहीं बीएनपी ने लोकतांत्रिक मर्यादा का हवाला देते हुए इसे संसद के अधीन रखने की मांग की है. अब देखना यह होगा कि आगामी सरकार और अंतरिम प्रशासन के बीच यह वैचारिक मतभेद बांग्लादेश की राजनीति को किस ओर ले जाता है.