नई दिल्ली: बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात करते हुए बीएनपी (BNP) अध्यक्ष तारिक रहमान ने अपनी नई कैबिनेट का गठन कर लिया है. 12 फरवरी 2026 को हुए 13वें संसदीय चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल करने के बाद, मंगलवार को ढाका में 25 नवनिर्वाचित सांसदों ने मंत्री पद की शपथ ली. इस नई कैबिनेट की सबसे बड़ी विशेषता दो अल्पसंख्यक नेताओं, निताई रॉय चौधरी और दीपेन दीवान की नियुक्ति रही है, जिसे रहमान का एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है.
कैबिनेट में शामिल हिंदू नेता निताई रॉय चौधरी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है. 1949 में जन्मे चौधरी एक मंझे हुए वकील और अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं. उन्होंने मगुरा-2 संसदीय क्षेत्र से जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार मुस्तर्शीद बिल्लाह को 30,838 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी. चौधरी को कुल 1,47,896 वोट मिले. पार्टी के शीर्ष रणनीतिक सलाहकार माने जाने वाले चौधरी की नियुक्ति ने उन अटकलों पर विराम लगा दिया, जिनमें अनुभवी नेता गोयेश्वर चंद्र रॉय को जगह मिलने की बात कही जा रही थी. गोयेश्वर रॉय 1991-1996 की खालिदा जिया सरकार में राज्य मंत्री रह चुके हैं.
कैबिनेट में दूसरे अल्पसंख्यक चेहरे के रूप में दीपेन दीवान को शामिल किया गया है. दीवान दक्षिण-पूर्व रंगमती जिले की सीट से जीत कर आए हैं और बौद्ध बहुल 'चकमा' एथनिक माइनॉरिटी ग्रुप का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने एक निर्दलीय चकमा उम्मीदवार को नजदीकी मुकाबले में हराया. हालांकि उनकी धार्मिक पहचान को लेकर कुछ हलकों में मतभेद हैं, लेकिन कैबिनेट में उनकी मौजूदगी जातीय अल्पसंख्यकों के प्रति बीएनपी के बदलते रुख को दर्शाती है.
शपथ ग्रहण समारोह नेशनल पार्लियामेंट के साउथ प्लाजा में आयोजित हुआ, लेकिन इसमें एक बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब बीएनपी सांसदों ने 'कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल' के सदस्य के तौर पर शपथ लेने से इनकार कर दिया. इसे मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के लिए एक तगड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. वर्तमान में 12वीं संसद के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के पद खाली होने के कारण, मुख्य चुनाव आयुक्त ने शपथ दिलाई, जिसका संचालन पार्लियामेंट सचिवालय सेक्रेटरी कनीज मौला ने किया.
रहमान की 25 सदस्यीय टीम में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खोशरू महमूद चौधरी, सलाहुद्दीन अहमद, मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद, और अफरोजा खानम रीटा जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं. इसके अलावा सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन और शेख रबीउल आलम जैसे नेताओं को भी जगह दी गई है.