किसी गुलाम देश को आजादी दिलाने वाले 'क्रांतिवीरों' को उस देश की जनता जन्म-जन्मांतर तक याद रखती है. यह देश कभी शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेता जी सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी को कभी नहीं भूल पाएगा. चीन कभी माओत्से तुंग को नहीं भूल पाएगा और दक्षिण अफ्रीका कभी नेल्सन मंडेला को. लेकिन क्या आपको पता है कि बांग्लादेशियों को अपने स्वतंत्रता सेनानियों से इतनी नफरत है कि वे उनसे जुड़े हर प्रतीक, निशान और मूर्तियों को मिटा रहे हैं.
बांग्लादेश से ऐसी ही हिंसक तस्वीरें आ रही हैं. बांग्लादेशी प्रदर्शनकारी, अब एहसानफरामोशी पर उतर आए हैं. कंग्रेस नेता शशि थरूर ने एक ऐसी ही तस्वीर शेयर की है, जिसमें बांग्लादेश के 'मुक्ति संक्राम' की स्मृति में बनी एक ऐतिसाहिक तस्वीर को तोड़ डाला गया है. यह पहली बार नहीं हुआ है, जब बांग्लादेशी अपने 'राष्ट्रपिता' बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या कर सकते हैं, उनकी मूर्तियों को जमींदोज करते हैं तो ऐसे प्रतीक चिह्न उनके लिए क्या मायने रखते हैं.
शशि थरूर ने सोमवार को 'मुक्ति संग्राम मेमोरियल' की टूटी-फूटी तस्वीरें शेयर की हैं. बांग्लादेश लिबरेशन वार मेमोरियल कॉम्प्लेक्स और अमरकानन से आई तस्वीरें हैरान कर ही हैं. इन मूर्तियों को भारत विरोधी तत्वों ने तोड़ डाला है. उन्होंने अपने अतीत से घिन आती है और वे भारत से जुड़े हर प्रतीक मिटा रहे हैं. इम मूर्तियों में एक ऐतिहासिक तस्वीर भी है, जिसे पाकिस्तान कभी नहीं बूल पाएगा.
जंग में जब भारत के सामने पाकिस्तानी सेना के जवानों ने घुटने टेके थे, तब 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद हजारों जवानों ने सरेंडर किया था. भारत और बांग्लादेश के बीच एक समझौता हुआ था, जिसे इतिहास में पाकिस्तान इंट्रूमेंट ऑफ सरेंडर के नाम से जानते हैं.
शशि थरूर ने लिखा है कि बांग्लादेश में अब भारत विरोधी तत्व अराजकता पर उतर आए हैं. उन्होंने नोबल विजेता मुहम्मद यूनुस की अतंरिम सरकार के गुहार लगाई है कि वे अब कानून व्यवस्था को संभालें. उन्होंने कहा कि इसे जानकर दुख हो रहा है कि शहीद मेमोरियल कॉम्प्लेक्स का ऐसा अंजाम देखर दुख होता है.
शशि थरूर ने लिखा, 'ऐसी तस्वीरों को देखकर तकलीफ होती है. मुजीबनगर में साल 1971 के शहीद स्मारक परिसर में स्थित मूर्तियों को भारत विरोधी उपद्रवियों ने ध्वस्त कर दिया है. ऐसी तस्वीरों को देखना कितना दुखद है. भारत से जुड़े सांस्कृतिक केंद्रों, मंदिरों और हिंदुओं के घरों पर हमले किए जा रहे हैं. कुछ मुस्लिम नागरिक अल्पसंख्यकों के घरों की हिफाजत कर रहे हैं. ऐसे प्रदर्शनकारियों का एजेंडा साफ है. मुहम्मद यूनुस सरकार को तत्काल इस पर एक्शन लेना चाहिए. बांग्लादेशियों में रहने वाले हर धर्म की रक्षा होनी चाहिए. बांग्लादेश बेहद अस्थिर वक्त से जूझ रहा है, इस अराजक अतिवाद की कोई माफी नहीं है.'
Sad to see images like this of statues at the 1971 Shaheed Memorial Complex, Mujibnagar, destroyed by anti-India vandals. This follows disgraceful attacks on the Indian cultural centre, temples and Hindu homes in several places, even as reports came in of Muslim civilians… pic.twitter.com/FFrftoA81T
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) August 12, 2024
बांग्लादेश, आजादी के बाद सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. अंतरिम सरकार के चीफ मुहम्मद यूनुस हैं लेकिन उनकी पकड़ न तो सेना पर है, न ही वहां की पुलिस पर. लोग मारे जा रहे हैं, भीड़ अराजक है और हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है. ढाका में अल्पसंख्यक प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं और इंसाफ मांग रहे हैं. वे चाहते हैं कि उन्हें सुरक्षा के साथ रहने दिया जाए.