नई दिल्ली: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच बने नए रक्षा गठजोड़ का दायरा बढ़ सकता है. बांग्लादेश ने इस समझौते में शामिल होने के संकेत दिए हैं. बांग्लादेश के दो राज्य मंत्रियों ने कहा है कि ढाका अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए किसी आर्थिक या रक्षा ढांचे का हिस्सा बनने पर विचार करेगा. इस घटनाक्रम पर भारत की भी नजर रहेगी, क्योंकि क्षेत्र में एक नए सामूहिक रक्षा गठजोड़ के उभरने से रणनीतिक समीकरण बदल सकते हैं.
बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि सरकार ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति के तहत फैसले ले रही है. उन्होंने संकेत दिया कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की से जुड़े किसी आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने की संभावना पर सकारात्मक रुख है. उनके मुताबिक, बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापारिक परिस्थितियों को देखते हुए ढाका अपने हितों के आधार पर फैसला करेगा.
विदेश मामलों की एक अन्य राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने भी इस संभावना का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि किसी भी संधि या बहुपक्षीय संगठन में शामिल होने का निर्णय इस आधार पर होगा कि उससे बांग्लादेश और उसके नागरिकों के हित सुरक्षित रहते हैं या नहीं. इस बीच प्रधानमंत्री तारीक रहमान के जल्द रियाद जाने और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की संभावना भी चर्चा में है.
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसे ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ कहा जा रहा है. समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को सभी पर हमला माना जाएगा. इसका उद्देश्य तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाना और किसी संभावित आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध क्षमता मजबूत करना है.
इस रक्षा समझौते में मिस्र की संभावित दिलचस्पी ने भी इसे क्षेत्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बना दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी समझौते का स्वागत किया है. कुछ क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह गठजोड़ ईरान के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश हो सकता है. हालांकि, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने साफ किया है कि समझौता किसी खास देश के खिलाफ नहीं है और इसका मकसद अपनी संप्रभुता की रक्षा करना है.
बांग्लादेश के संभावित जुड़ाव से इस रक्षा ढांचे का भौगोलिक और रणनीतिक महत्व बढ़ सकता है. भारत के लिए भी यह घटनाक्रम अहम है, क्योंकि दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के बीच सुरक्षा सहयोग का नया नेटवर्क आकार ले सकता है. हालांकि, ढाका ने अभी समझौते में शामिल होने का अंतिम फैसला नहीं किया है. उसके दोनों मंत्रियों के बयानों से इतना जरूर साफ है कि बांग्लादेश इस विकल्प को गंभीरता से देख रहा है.