नई दिल्ली: ग्लोबल डिप्लोमेसी की बिसात पर इस समय एक बड़ा पावर गेम चल रहा है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने भारी-भरकम टैरिफ से दुनिया को चौंका रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ भारत और ब्राजील ने हाथ मिला लिया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा से फोन पर बात की और ऐलान किया कि लूला जल्द ही भारत दौरे पर आएंगे.
यह बातचीत तब हुई है जब ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 50% तक टैरिफ लगा रखा है और इसे रूसी तेल खरीदने का जुर्माना बताया है. पीएम मोदी ने X पर लिखा कि ग्लोबल साउथ के हितों के लिए भारत और ब्राजील का साथ आना बेहद जरूरी है. ब्राजील पर भी ट्रंप ने 40% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था. अब दोनों देश BRICS के मंच का इस्तेमाल करके ट्रंप की इन व्यापारिक पाबंदियों का तोड़ निकालने की कोशिश कर रहे हैं.
Glad to speak with President Lula. We reviewed the strong momentum in the India-Brazil Strategic Partnership, which is poised to scale new heights in the year ahead. Our close cooperation is vital for advancing the shared interests of the Global South. I look forward to welcoming…
— Narendra Modi (@narendramodi) January 22, 2026Also Read
दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी को अपना महान दोस्त और शानदार नेता बताया. उन्होंने कहा कि "मैं मोदी का बहुत सम्मान करता हूं, हम एक अच्छा व्यापार सौदा करेंगे. वहीं हकीकत इससे थोड़ी अलग दिखती है. एक तरफ दोस्ती का दावा है, तो दूसरी तरफ ट्रंप के सलाहकार दावा कर रहे हैं कि भारत पर टैरिफ 500% तक बढ़ाया जा सकता है. ट्रंप ने खुद कहा था कि मोदी जानते थे कि मैं खुश नहीं हूं और मुझे खुश करना जरूरी था.
यह केवल बड़े नेताओं की बातचीत नहीं है. जब अमेरिका किसी देश पर टैरिफ बढ़ाता है, तो इसका सीधा असर फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों और एक्सपोर्टर्स पर पड़ता है. ब्राजील में जब ट्रंप ने खाने-पीने की चीजों पर टैक्स बढ़ाया, तो वहां कीमतें इतनी बढ़ गईं कि खुद ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिर गई. भारत में भी हीरा, कपड़ा और आईटी क्षेत्र के लाखों कर्मचारी इस व्यापारिक अनिश्चितता के कारण भविष्य को लेकर चिंतित हैं.
2026 की शुरुआत में राष्ट्रपति लूला की भारत यात्रा गेम-चेंजर साबित हो सकती है. दोनों देश मिलकर एक ऐसी व्यापारिक दीवार खड़ी करना चाहते हैं जो ट्रंप के टैरिफ वार का मुकाबला कर सके.