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India Daily

3640 मौतें...90 हजार घर गिरे और..., US-इजरायल और ईरान के 40 दिन की जंग में किसे कितना हुआ नुकसान? जानें

40 दिन की जंग में 3640 मौतें और भारी तबाही हुई. ईरान को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. 90 हजार घर, 760 स्कूल और 307 अस्पताल नष्ट हुए.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
3640 मौतें...90 हजार घर गिरे और..., US-इजरायल और ईरान के 40 दिन की जंग में किसे कितना हुआ नुकसान? जानें
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: 28 फरवरी 2026 से शुरू हुई अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 40 दिन तक चली भीषण जंग ने पूरे मध्य पूर्व को हिला कर रख दिया. इस संघर्ष में अब तक कुल 3640 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं और भारी पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ है.

जंग की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों और मिसाइल सिस्टम पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए. धीरे-धीरे यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल गया और कई देश इसकी चपेट में आ गए.

इस जंग में किसका हुआ ज्यादा नुकसान?

इस जंग में सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार वहां 2076 लोगों की मौत हुई और 26,500 से अधिक लोग घायल हुए. लेबनान में 1497 लोगों की जान गई, जहां हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच भीषण संघर्ष हुआ.

इजरायल में कितने लोग की हुई मौत?

इजरायल में 26 लोगों की मौत हुई और 7000 से ज्यादा लोग घायल हुए. वहीं अमेरिकी सेना के 13 जवान मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए. खाड़ी देशों में भी नुकसान दर्ज किया गया, जिनमें कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, यूएई, ओमान और कतर शामिल हैं.

और क्या-क्या हुआ नुकसान?

इस युद्ध में केवल जान-माल का ही नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे का भी भारी नुकसान हुआ है. कुल 90 हजार घर पूरी तरह तबाह हो गए, जिससे लाखों लोग बेघर हो गए. इसके अलावा 760 स्कूल और 307 अस्पताल या तो नष्ट हो गए या उपयोग के लायक नहीं रहे. हजारों व्यापारिक इमारतें, फैक्ट्रियां और बाजार भी बर्बाद हो गए.

ऊर्जा क्षेत्र पर क्या पड़ा असर?

ऊर्जा क्षेत्र पर भी इसका गहरा असर पड़ा. Strait of Hormuz में तेल परिवहन बाधित होने से वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. कई देशों में ईंधन की कमी तक महसूस की गई.

इस जंग के कारण लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े और शरण लेने पर मजबूर होना पड़ा. स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया और कई देशों की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा.

हालांकि 7 अप्रैल के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का सीजफायर लागू हुआ है, जिससे हालात में कुछ राहत मिली है. लेकिन बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई इस समझौते से अलग रहेगी.