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26 तारीख का खौफनाक संयोग! नेपाल से चेरनोबिल और 26/11 तक, क्यों इसी दिन बार-बार आई तबाही?

26 तारीख से जुड़ी कई बड़ी प्राकृतिक आपदाओं, औद्योगिक हादसों और आतंकी घटनाओं ने दुनिया को झकझोरा है. नेपाल की हालिया त्रासदी ने इस संयोग को फिर चर्चा में ला दिया है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
26 तारीख का खौफनाक संयोग! नेपाल से चेरनोबिल और 26/11 तक, क्यों इसी दिन बार-बार आई तबाही?
Courtesy: ai generated

इतिहास में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं, जिनसे जुड़ी घटनाएं लंबे समय तक लोगों की यादों में बनी रहती हैं. 26 तारीख भी ऐसी ही एक तारीख है, जिस दिन अलग-अलग वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं, औद्योगिक दुर्घटनाओं और आतंकी हमलों ने दुनिया को झकझोर दिया. नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर इस संयोग की चर्चा तेज कर दी है. हालांकि किसी तारीख को आपदा का कारण मानने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन 26 तारीख से जुड़ी बड़ी घटनाओं की सूची जरूर चौंकाने वाली है.

26 अगस्त 2026: नेपाल-तिब्बत सीमा पर तबाही

नेपाल के रसुवा जिले में 26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया. उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस आपदा में 900 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों लोग लापता बताए गए. सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्र में आई इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया. राहत और बचाव दलों के सामने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चुनौती और बढ़ गई.

26 दिसंबर 2004: हिंद महासागर सुनामी

26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के सुमात्रा के पास समुद्र के भीतर 9.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया. इसके बाद उठी सुनामी लहरों ने हिंद महासागर से लगे कई देशों को अपनी चपेट में ले लिया. इंडोनेशिया, श्रीलंका, भारत और अन्य प्रभावित देशों में भारी तबाही हुई. इस आपदा में करीब 2.28 लाख लोगों की मौत हुई. इसे आधुनिक इतिहास की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है.

26 जनवरी 2001: गुजरात भूकंप

भारत के लिए 26 जनवरी की तारीख एक अलग वजह से भी बेहद संवेदनशील है. वर्ष 2001 में गणतंत्र दिवस के दिन गुजरात के कच्छ क्षेत्र में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया. कुछ ही मिनटों में हजारों इमारतें ढह गईं और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ. इस त्रासदी में करीब 20 हजार लोगों की जान चली गई. भुज और आसपास के इलाकों में राहत अभियान लंबे समय तक चलता रहा.

26 जुलाई 2005: मुंबई में बारिश ने रोकी रफ्तार

26 जुलाई 2005 को मुंबई में हुई रिकॉर्ड बारिश ने देश के आर्थिक केंद्र की रफ्तार थाम दी थी. महज 24 घंटे के दौरान करीब 944 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. सड़कों पर पानी भर गया, परिवहन व्यवस्था चरमरा गई और कई इलाकों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ. इस जलप्रलय में 1,094 लोगों की मौत हुई. यह घटना मुंबई के इतिहास में सबसे गंभीर शहरी बाढ़ की घटनाओं में शामिल है.

26 दिसंबर 2003: ईरान का बाम भूकंप

26 दिसंबर 2003 को ईरान के ऐतिहासिक शहर बाम में 6.6 तीव्रता का भूकंप आया. शहर की कई पुरानी इमारतें और ऐतिहासिक संरचनाएं इस झटके में ढह गईं. बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए. इस हादसे में करीब 31 हजार लोगों की मौत हुई. घटना ने भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में मजबूत निर्माण और आपदा प्रबंधन की जरूरत को फिर सामने ला दिया.

26 दिसंबर 1939: तुर्की में विनाशकारी भूकंप

26 दिसंबर 1939 को पूर्वी तुर्की में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था. उस दौर में आपदा राहत और संचार व्यवस्था आज की तुलना में काफी सीमित थी. भूकंप ने बड़े इलाके में भारी तबाही मचाई और 32,700 से अधिक लोगों की जान चली गई. यह घटना तुर्की के सबसे घातक भूकंपों में गिनी जाती है.

26 मई 2006 और 26 अक्टूबर 2015: दो बड़े भूकंप

26 मई 2006 को इंडोनेशिया के जावा क्षेत्र में आए भूकंप ने भीषण तबाही मचाई. इसमें 5,700 से अधिक लोगों की मौत हुई. इसके करीब एक दशक बाद 26 अक्टूबर 2015 को हिंदुकुश क्षेत्र में शक्तिशाली भूकंप आया, जिसका असर भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान तक महसूस किया गया. इस घटना में 400 से अधिक लोगों की मौत हुई और कई क्षेत्रों में इमारतों को नुकसान पहुंचा.

26 अप्रैल 1986: चेर्नोबिल परमाणु हादसा

26 अप्रैल 1986 को तत्कालीन सोवियत संघ के चेर्नोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र में रिएक्टर नंबर चार के परीक्षण के दौरान बड़ा हादसा हुआ. विस्फोट के बाद रेडियोधर्मी पदार्थ वातावरण में फैल गए. इसका असर केवल तत्काल आसपास के इलाके तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लंबे समय तक स्वास्थ्य और पर्यावरण पर दिखाई दिया. चेर्नोबिल दुनिया की सबसे गंभीर परमाणु दुर्घटनाओं में शामिल है.

26 अप्रैल 1942: चीन की कोयला खदान दुर्घटना

26 अप्रैल 1942 को चीन की बेंक्सीहू कोयला खदान में जहरीली गैस और धूल के कारण विस्फोट हुआ. खदान के भीतर फंसे श्रमिकों के लिए हालात बेहद भयावह हो गए. इस हादसे में 1,549 खनिकों की मौत हुई. इसे इतिहास की सबसे घातक कोयला खदान दुर्घटनाओं में गिना जाता है और यह औद्योगिक सुरक्षा की गंभीरता को दिखाता है.

26 मई 1991: लाउडा एयर हादसा

26 मई 1991 को बैंकॉक से वियना जा रहा लाउडा एयर का बोइंग 767 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. विमान हवा में टूटकर नीचे गिरा और उसमें सवार सभी 223 लोगों की मौत हो गई. तकनीकी खराबी को दुर्घटना के प्रमुख कारणों में बताया गया. यह घटना विमानन इतिहास की गंभीर दुर्घटनाओं में शामिल है.

26 नवंबर 2008: मुंबई 26/11 हमला

26 नवंबर 2008 की रात मुंबई पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया. पाकिस्तान से समुद्री रास्ते से आए 10 आतंकियों ने शहर के कई प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया. ताज होटल, सीएसएमटी स्टेशन और नरीमन हाउस समेत कई जगहों पर हमले हुए. यह हिंसा कई दिनों तक चली. इसमें 166 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए.

क्या 26 तारीख वाकई मनहूस है?

इन घटनाओं को एक साथ देखने पर 26 तारीख और बड़ी त्रासदियों के बीच एक दिलचस्प संयोग जरूर दिखाई देता है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि तारीख खुद किसी आपदा की वजह बनती है. ज्योतिष के नजरिए से इस संयोग की अलग व्याख्या की जाती है. ज्योतिर्विदों के मुताबिक केवल तारीख को जिम्मेदार मानना पर्याप्त नहीं है. उनके अनुसार कई घटनाओं के आसपास ग्रहणकाल और ग्रहों की विशेष स्थितियां भी देखने को मिलती हैं.

उनका कहना है कि अंकशास्त्र में 26 का योग 2+6 यानी 8 होता है और आठ को शनि का अंक माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार शनि का संबंध कठिन परिस्थितियों और बाधाओं से जोड़ा जाता है. हालांकि यह एक ज्योतिषीय व्याख्या है, वैज्ञानिक रूप से किसी आपदा और तारीख के बीच ऐसा सीधा संबंध प्रमाणित नहीं है. इसलिए 26 तारीख से जुड़ी घटनाओं को फिलहाल इतिहास के असाधारण संयोग के तौर पर ही देखना ज्यादा उचित होगा.