'तुरंत खोल दो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज...', 22 देशों ने किया ईरान के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की कार्रवाई पर 22 देशों ने संयुक्त रूप से कड़ी निंदा की है. अमेरिका ने अब तक 8 हजार से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं. वैश्विक तेल व्यापार पर गहरा संकट गहराता जा रहा है.
नई दिल्ली: ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकियों और हमलों के बीच 22 देशों ने मिलकर इसकी कड़ी निंदा की है. इनमें यूरोपीय देशों के साथ खाड़ी के अहम देश भी शामिल हैं. दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान में 8 हजार से अधिक सैन्य लक्ष्यों पर हमले कर दावा किया है कि ईरान की लड़ाकू क्षमता लगातार कम हो रही है. तनाव चरम पर है.
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, यूएई और बहरीन समेत 22 देशों ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने निहत्थे वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए और तेल-गैस ढांचे को निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि ईरानी बलों ने जलडमरूमध्य की वास्तविक बंदी कर दी है. यह अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है. देशों ने ईरान से तुरंत धमकियां, माइंस बिछाना और ड्रोन हमले बंद करने की मांग की है.
अमेरिका ने बताया, 130 ईरानी जहाज तबाह
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एडमिरल ब्रैड कूपर ने एक्स पर पोस्ट किए वीडियो में बताया कि अब तक ईरान में 8 हजार से अधिक सैन्य लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं. इनमें 130 ईरानी जहाज शामिल हैं. उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तीन सप्ताह में किसी नौसेना ने इतना बड़ा विनाश नहीं किया था. अमेरिकी हमले तेज होने से ईरान की ताकत घट रही है.
हॉर्मुज स्ट्रेट: दुनिया की ऊर्जा नस पर संकट
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के 20 प्रतिशत तेल-गैस व्यापार का अहम रास्ता है. इसकी बंदी से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ रहा है. तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और कई देशों में ईंधन महंगा हो गया है. ईरान का दावा है कि यह रास्ता केवल दुश्मन जहाजों के लिए बंद है, लेकिन वाणिज्यिक जहाजरानी ठप हो चुकी है.
संयुक्त राष्ट्र का हवाला, सुरक्षित मार्ग की अपील
इन 22 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का हवाला देते हुए ईरान से स्वतंत्र नौवहन के सिद्धांत का पालन करने को कहा है. उन्होंने साफ कहा कि वे जलडमरूमध्य में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास में योगदान देने को तैयार हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर समाधान निकालने की अपील की गई है, ताकि ऊर्जा बाजार स्थिर रहें.
कौन-कौन से देश हैं इस गठबंधन में?
यह संयुक्त बयान ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन और लिथुआनिया समेत 22 देशों ने जारी किया है. इन देशों ने ईरान की कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बताया. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा रणनीतिक भंडार जारी करने की सराहना की और आगे के कदम उठाने का वादा किया.
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