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India Daily

'दुष्ट हमारा भरोसा जीतने में नाकाम रहा', शांति वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका पर भड़का ईरान

अमेरिका-ईरान वार्ता 21 घंटे चली, लेकिन बिना नतीजे खत्म हुई. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए. परमाणु कार्यक्रम और शर्तों के विवाद के चलते समझौता नहीं हो सका और तनाव बरकरार है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'दुष्ट हमारा भरोसा जीतने में नाकाम रहा', शांति वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका पर भड़का ईरान
Courtesy: GROK

नई दिल्ली: इस्लामाबाद में हुई अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत एक बार फिर बेनतीजा साबित हुई. करीब 21 घंटे तक चली इस वार्ता से उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा, लेकिन अंत में आरोप-प्रत्यारोप ही सामने आए. ईरान ने अमेरिका पर शर्तें थोपने का आरोप लगाया, जबकि अमेरिकी पक्ष ने कहा कि उसने पूरी ईमानदारी से समझौते की कोशिश की. इस विफलता ने न सिर्फ कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक हालात को भी अस्थिर बना दिया है.

बातचीत में अविश्वास बना सबसे बड़ी बाधा

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने साफ कहा कि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा. उन्होंने बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के दौरान सकारात्मक पहल की, लेकिन दूसरी तरफ से विश्वास की कमी साफ नजर आई. ईरान का मानना है कि अमेरिका बातचीत के जरिए वही हासिल करना चाहता था, जो वह युद्ध में नहीं कर पाया. इसी वजह से उसने अमेरिकी शर्तों को पूरी तरह खारिज कर दिया.

परमाणु कार्यक्रम पर अटका मामला

इस वार्ता का सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर रहा. अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की स्पष्ट प्रतिबद्धता दे और अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को सीमित करे. लेकिन ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता का मुद्दा बताते हुए अस्वीकार कर दिया. ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने कहा कि किसी भी देश पर शर्तें थोपकर बातचीत सफल नहीं हो सकती, और अमेरिका को यह बात समझनी होगी.

कूटनीति जारी, लेकिन रास्ता मुश्किल

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा कि कूटनीति कभी खत्म नहीं होती और यह देश के हितों की रक्षा का माध्यम है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हालिया बातचीत अविश्वास और युद्ध जैसे माहौल में हुई, जिससे किसी ठोस नतीजे की उम्मीद कम थी. उन्होंने कहा कि ईरान अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेगा और हर परिस्थिति में अपने हितों की रक्षा करेगा.

वैश्विक असर और बढ़ती चिंता

इस वार्ता के विफल होने का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है. होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. ईरान ने बातचीत में अमेरिकी सैनिकों की वापसी और प्रतिबंध हटाने जैसी मांगें रखीं, जो अमेरिका को स्वीकार नहीं थीं. ऐसे में दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं और फिलहाल समाधान की कोई स्पष्ट दिशा नजर नहीं आ रही.