इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से हटाने के लिए राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. अनुभवी अरब सांसद अहमद तिबी ने विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट को समर्थन देने की पेशकश की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अरब पार्टियां सरकार में शामिल नहीं होंगी और न ही किसी मंत्री पद की मांग करेंगी. उनका समर्थन बाहर से होगा.
शुक्रवार देर रात चैनल 12 से बातचीत में तिबी ने कहा कि अरब सांसद ऐसी वैकल्पिक सरकार का समर्थन करने के लिए तैयार हैं, जो मौजूदा सरकार को हटाना चाहती है. उन्होंने आइजेनकोट से पूर्व प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन की तरह काम करने की अपील की. राबिन ने फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) के साथ ओस्लो समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अरब सांसदों के समर्थन का सहारा लिया था.
तिबी ने कहा कि वे मौजूदा सरकार को हटाकर नई सरकार बनाने की कोशिश करने वालों की मदद करना चाहते हैं. उन्होंने साफ किया कि अरब पार्टियां सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगी, लेकिन उनके बिना राजनीतिक बदलाव संभव नहीं होगा.
इजरायल के हालिया चुनाव के बाद राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है. किसी भी गठबंधन को अपने दम पर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं मिली हैं. जॉइंट लिस्ट को 11 और राम पार्टी को 8 सीटें मिली हैं. इस तरह 120 सदस्यों वाली संसद यानी नेसेट में इन दोनों के पास कुल 19 सीटें हैं. नेतन्याहू विरोधी खेमे के पास 67 सीटें हैं. ऐसे में अरब पार्टियों का समर्थन मिलने पर इस खेमे के लिए बहुमत जुटाना संभव हो सकता है.
हालांकि, विपक्षी दलों में शामिल याशर, बियाचद और यिस्राएल बेतेनु ने अरब पार्टियों के साथ गठबंधन सरकार बनाने से इनकार किया है. तिबी ने कहा कि अरब मतदाताओं की बढ़ी हुई भागीदारी ने नेतन्याहू को दोबारा सरकार बनाने से रोकने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने चुनाव को आत्मरक्षा की कार्रवाई बताया. जॉइंट लिस्ट राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से नेतन्याहू विरोधी खेमे के किसी नेता को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश करने की तैयारी में है. इस भूमिका के लिए गादी आइजेनकोट का नाम सामने आ रहा है.
जॉइंट लिस्ट के अध्यक्ष यूसुफ जबरीन ने बताया कि गादी आइजेनकोट, डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलान और नफ्ताली बेनेट की बियाचद पार्टी के सदस्यों के साथ शुरुआती बातचीत शुरू हो चुकी है.
अरब गठबंधन ने समर्थन के बदले कुछ शर्तें रखी हैं. इनमें फिलिस्तीनी देश के गठन की दिशा में कूटनीतिक प्रक्रिया शुरू करना, अरब बहुल नगरपालिकाओं में हिंसक अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त बजट वाली योजना बनाना और घरों को गिराने की कार्रवाई रोकना शामिल है.
इन मांगों के कारण यह बातचीत मुश्किल हो सकती है, क्योंकि विपक्ष के कुछ यहूदी नेतृत्व वाले दल फिलिस्तीनी देश के गठन का विरोध करते हैं.
जबरीन के मुताबिक, अरब मतदाताओं की भागीदारी 2022 के चुनाव में 38 प्रतिशत थी, जो ताजा चुनाव में बढ़कर करीब 80 प्रतिशत हो गई. उन्होंने कहा कि अरब समुदाय ने इस चुनाव को आपातकाल जैसी स्थिति के रूप में देखा. मतदाता नेतन्याहू के साथ-साथ इतामार बेन ग्विर और बेजालेल स्मोट्रिच जैसे नेताओं को सत्ता से हटाना चाहते थे.
जॉइंट लिस्ट ने चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों को भी खारिज किया है. अहमद तिबी ने कतर से अवैध फंडिंग मिलने के आरोपों को गलत बताया. वहीं, जबरीन ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रचार और खतरनाक बदनामी करार दिया.