पाकिस्तान ने सूडान को 1.5 अरब डॉलर (करीब 42 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपये) के हथियार और जेट विमानों की सप्लाई की डील को रद्द कर दिया है. यह कदम पाकिस्तान के करीबी सहयोगी सऊदी अरब के कहने पर उठाया गया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी ने पाकिस्तान को संकेत दिया कि वह इस डील के लिए फंडिंग नहीं करेगा, इसलिए इसे कैंसिल कर देना चाहिए. यह डील सूडान में चल रहे खूनी गृहयुद्ध के बीच हुई थी, जहां पिछले तीन सालों से सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच भीषण संघर्ष जारी है.
सऊदी अरब पाकिस्तान का सबसे पुराना और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है. उसने पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था को कई बार कर्ज और मदद देकर संभाला है. पिछले साल दोनों देशों के बीच एक पारस्परिक रक्षा समझौता भी हुआ, जिसमें कहा गया कि किसी एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा. ऐसे में जब सऊदी ने इस डील को रद्द करने का संकेत दिया, तो पाकिस्तान के पास कोई विकल्प नहीं बचा. सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, सऊदी ने साफ कर दिया कि वह अब इस डील के लिए पैसे नहीं देगा, जिसके बाद पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा.
यह डील सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त भर नहीं थी. इसके पीछे अफ्रीका में बढ़ते प्रॉक्सी वॉर की भी बड़ी वजह थी. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सूडान के संघर्ष में एक-दूसरे के विरोधी पक्षों का समर्थन करते हैं. सऊदी ने सूडान की सेना का समर्थन किया है, जबकि यूएई पर आरएसएफ (रैपिड सपोर्ट फोर्सेज) को मदद पहुंचाने के आरोप लगे हैं. कुछ पश्चिमी देशों ने सऊदी को सलाह दी थी कि वह अफ्रीका की इन लड़ाइयों से खुद को दूर रखे. इसी सलाह के बाद सऊदी ने सूडान के लिए अपनी रणनीति बदल दी और पाकिस्तान से यह डील रद्द करने को कहा.
सूडान के अलावा, पाकिस्तान की एक और बड़ी डील खतरे में आ गई है. रॉयटर्स ने दिसंबर में रिपोर्ट दी थी कि पाकिस्तान लीबियाई नेशनल आर्मी के साथ 4 अरब डॉलर की एक रक्षा डील पर बातचीत कर रहा था. अब सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब अपनी रणनीति पर फिर से विचार कर रहा है, जिससे यह डील भी मुश्किल में पड़ गई है. मार्च में रियाद में सूडानी सेना के नेताओं और सऊदी अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद ही फंडिंग रोकने का फैसला लिया गया. फिलहाल पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर कोई बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, उसे सऊदी के इस फैसले से बड़ा झटका लगा है.