IPL 2026 West Bengal Assembly Election 2026 Assembly Election 2026 US Israel Iran War Tamil Nadu Assembly Election 2026

हर साल बढ़ रही गर्मी, 60 डिग्री के पार गया तापमान तो क्या होगा? समझ लीजिए क्या है बर्दाश्त की हद

Heatwave: बीते कुछ सालों में भारत में हीटवेव का कहर बढ़ता ही जा रहा है. पिछले एक दशक में 6 हजार से ज्यादा लोग भीषण गर्मी की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं और हर साल यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में लोगों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं.

Freepik
Nilesh Mishra

इंसान के शरीर का सामान्य तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है. इसमें आधे डिग्री का भी फर्क आने पर इंसान को बुखार आने लगता है. हाल ही में दिल्ली के मुंगेशपुर का तापमान 52.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किए जाने के बाद हड़कंप मच गया है. मौसम वैज्ञानिक से लेकर डॉक्टर तक और जलवायु विशेषज्ञों से लेकर आम इंसान तक परेशान हो उठे हैं. पिछले कुछ साल से तापमान में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए लोगों के बीच डर बैठने लगा है कि आखिर यह तापमान कितना बढ़ेगा. लोग यह भी समझना चाह रहे हैं कि अगर तापमान 50 से 60 डिग्री सेल्सियस की ओर बढ़ता है तो इंसान को कितने नुकसान हो सकते हैं?

आमतौर पर 20 से 30 डिग्री तापमान सामान्य माना जाता है. यानी अगर किसी जगह का तापमान इसी के बीच है तो वहां रहने वाले लोगों को न तो ज्यादा गर्मी लगेगी और न ही सर्दी लगेगी. बीते कुछ सालों में देखा गया है कि कई शहरों और इलाकों का अधिकतम तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच रहा है. इसका नतीजा यह हो रहा है कि लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ रहे हैं. इसी तरह के तापमान और गर्मी के हालात को अब 'हीटवेव' का नाम दिया गया है. ग्लोबल वॉर्मिंग और बढ़ती गर्मी को देखते हुए लोगों की चिंताएं हैं कि आने वाले सालों में आखिर अधिकतम तापमान कितना जा सकता है.

अब तक का क्या रहा है रिकॉर्ड?

अगर अब तक की गर्मी के रिकॉर्ड को देखा जाए तो साल 1913 में अमेरिका के कैलिफोर्निया की डेथ वैली में अधिकतम तापमान 56.7 डिग्री मापा गया था. यानी यह अधिकतम तापमान कुल 111 साल पहले मापा गया था. पिछले साल ही ईरान के एयरपोर्ट पर अधिकतम तापमान 66 डिग्री सेल्सियम दर्ज किया गया था. भारत के कई हिस्सों में बीते कुछ सालों में अधिकतम तापमान 45 से 50 डिग्री के बीच दर्ज किया गया है.

50 के ऊपर गया तापमान तो क्या होगा?

2015 में भारत में किसी भी एक जगह पर अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. 2016 में 51, 2019 में 50.8, 2022 में 45 और 2023 में 45 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड दर्ज किया गया. इस साल 29 मई 2024 की तारीख को दिल्ली के मुंगेशपुर में 52.3 डिग्री सेल्सियस के तापमान ने हर किसी के होश उड़ा दिए. अब चिंताएं ये हैं कि अगर ऐसे ही तापमान हर साल बढ़ता रहा तो क्या होगा?

विज्ञान की मानें तो 46 से 60 डिग्री तापमान के बीच इंसान के शरीर की सेल्स यानी कोशिकाएं मरने लगती हैं. यहां यह भी बता दें कि 50 डिग्री से ज्यादा का तापमान कोशिकाओं को ऐसा नुकसान पहुंचा सकता है जिसे ठीक नहीं किया जा सकता. अगर इंसानी शरीर अपने आप ठंडा नहीं हो पाता तो हीट क्रैंप या हीटस्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गंभीर परिस्थितियों में ये जानलेवा भी हो सकती हैं. उदाहरण के लिए, कई बार भीषण गर्मी में पक्षियों को पेड़ से गिरते देखा जाता है और वे बुरी तरह से तड़प रहे होते हैं. इंसानों के अलावा कुत्तों को दौरे पड़ सकते हैं और वे बेहोश भी हो सकते हैं.

AFP की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में भारत के 6 हजार से ज्यादा लोग हीट स्ट्रोक के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं. हाल ही में दिल्ली में ही एक शख्स की मौत भीषण गर्मी के चलते हो गई. WHO का अनुमान है कि आने वाले समय में हीट स्ट्रोक संबंधी समस्याओं की वजह से दुनियाभर में हर साल लगभग ढाई लाख लोगों की मौत होने लगेगी.

कितना है खतरा?

  • 50 डिग्री से ज्यादा तापमान की स्थिति में सबसे ज्यादा नुकसान पक्षियों को हो सकता है
  • इंसानों में हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं बढ़ेंगी
  • तेज धूप और गर्मी के कारण आग लगने की घटनाएं बढ़ जाएंगी
  • कुत्तों और अन्य संवेदनशील जानवरों पर गर्मी कहर बनकर टूटेगी
  • जलाशयों में पानी तेजी से वाष्पित होगा जिससे जल संकट भी बढ़ेगा
  • ज्यादा तापमान के कारण कई फसलों पर बुरा असर पड़ेगा
  • तेज धूप के कारण ज्यादा जल वाष्पित होने के कारण बारिश के चक्र पर भी दुष्प्रभाव पड़ सकता है