हज यात्रियों को इस बार हवाई किराए के रूप में 10,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे. सरकार ने कहा कि मिडिल ईस्ट संकट और एटीएफ की बढ़ती कीमतों के बाद एयरलाइंस ने 400 डॉलर तक बढ़ोतरी मांगी थी, लेकिन बातचीत से यह 100 डॉलर पर सीमित कर दिया गया.
हज कमेटी ऑफ इंडिया ने वैश्विक स्तर पर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी के चलते इस साल हज यात्रियों के हवाई किराए में 10,000 रुपये की वृद्धि कर दी है. केंद्र सरकार का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी संकट के कारण एयरलाइंस ने 300 से 400 डॉलर प्रति यात्री की अतिरिक्त मांग की थी, लेकिन कड़ी बातचीत के बाद यह बोझ घटाकर केवल 100 डॉलर (लगभग 10,000 रुपये) प्रति यात्री कर दिया गया. हालांकि विपक्ष ने इस फैसले को अन्याय करार दिया है.
STORY | Haj pilgrims to pay Rs 10K more due to high ATF prices; govt says protected them from larger burden
— Press Trust of India (@PTI_News) April 30, 2026
The Haj Committee of India has raised the Haj airfare by Rs 10,000 per pilgrim this year due to a sharp global rise in Aviation Turbine Fuel (ATF) prices, with the Centre… pic.twitter.com/rWZWTLj2vp
हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, मिडिल ईस्ट के हालातों को देखते हुए वर्ष 2026 के हज एयरफेयर में एक बार का संशोधन किया गया है. इसके तहत हर यात्री को प्रस्थान बिंदु चाहे जो भी हो, अतिरिक्त 100 डॉलर (करीब 10,000 रुपये) देने होंगे. अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने बताया कि एयरलाइंस ने एटीएफ की कीमतों में भारी उछाल के चलते 400 डॉलर प्रति यात्री तक की बढ़ोतरी की मांग की थी, जिसे बातचीत के जरिए सीमित किया गया. यह राशि यात्रियों को 15 मई तक जमा करनी होगी.
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने X पर लिखा कि अनगिनत परिवारों के लिए हज सालों संजोए गए सपने की तरह होता है. उन्होंने कहा, 'हम एयरलाइंस को दोष नहीं दे सकते क्योंकि एटीएफ की कीमतें भू-राजनीतिक तनाव के कारण बढ़ी हैं. एयरलाइंस 300-400 डॉलर की बढ़ोतरी चाहती थी, लेकिन हमारी बातचीत से इसे घटाकर 100 डॉलर कर दिया गया, जिससे हर यात्री की बचत 200-300 डॉलर हुई.' उन्होंने साफ किया कि यह फैसला पारदर्शी तरीके से हज 2026 के संचालन को सुचारू बनाने के लिए लिया गया.
हज एयरफेयर में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन औवेसी ने इस सर्कुलर को वापस लेने की मांग की है. कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि यात्रा से ठीक पहले अतिरिक्त 10,000 रुपये वसूलना पूर्ण अन्याय है. उन्होंने पूछा, 'जब किराया पहले से तय था तो आखिरी वक्त पर यह वृद्धि क्यों?' विपक्ष का आरोप है कि सरकार हज यात्रियों के धार्मिक भावनाओं का फायदा उठा रही है, जबकि केंद्र इसे संकटकालीन जरूरी कदम बता रहा है.
अल्पसंख्यक मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि निजी टूर ऑपरेटर तो पहले ही किराए में 150 डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी कर चुके थे. मंत्रालय ने कहा, 'हम हर उस यात्री की चिंता को समझते हैं जो वर्षों बचत कर हज पर जाता है. यही वजह है कि हज कमेटी ने उनकी ओर से कड़ा मोलभाव किया. यह किसी प्रकार का शोषण नहीं है, बल्कि सरकार का दबाव अवशोषित कर यात्रियों को बड़े बोझ से बचाने का प्रयास है.' मंत्रालय ने कहा कि सर्कुलर पूरी तरह पारदर्शी है और यह फैसला एक लाख से अधिक पंजीकृत यात्रियों के हज संचालन को बाधित न करने के लिए उठाया गया है.