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India Daily

बांद्रा में मस्जिद गिराए जाने पर भड़की हिंसा, गुस्साई भीड़ ने जमकर बरसाए पत्थर; अतिक्रमण के खिलाफ चल रहा था अभियान

मस्जिद गिराये जाने से स्थानीय लोग नाराज हो गए और उन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी. लोगों नारेबाजी के साथ अतिक्रमण विरोधी अभियान को रोकने की कोशिश की.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
बांद्रा में मस्जिद गिराए जाने पर भड़की हिंसा, गुस्साई भीड़ ने जमकर बरसाए पत्थर; अतिक्रमण के खिलाफ चल रहा था अभियान
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मुंबई के बांद्रा में चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के दूसरे दिन उस समय बवाल मच गया जब पश्चिम रेलवे ने एक मस्जिद के ढांचे को ध्वस्थ कर दिया. मस्जिद गिराये जाने से स्थानीय लोग नाराज हो गए और उन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी. लोगों नारेबाजी के साथ अतिक्रमण विरोधी अभियान को रोकने की कोशिश की. स्थिति को काबू करने के के लिए मौके पर भारी संख्या में मौजूद पुलिस बल को हल्का लाठीचार्ज भी करना पड़ा जिसके बाद भीड़ तितर-बितर हो गई. इस घटना के बाद कुछ समय तक इलाके में तनाब बना रहा. काफी समय बाद जाकर स्थिति सामान्य हो पाई। नगर निगम प्रशासन ने जारी तोड़-फोड़ अभियान के संबंध में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.

रेलवे प्रशासन ने चलाया अतिक्रमण विरोधी अभियान

हिंसा के दौरान कुछ लोगों ने मुंबई पुलिस पर पानी और प्लास्टिक की बोतलें  भी फेंकीं. घटना स्थल से सामने आए वीडियो में पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच तीखी झड़पें देखने को मिलीं. बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट से अनुमति मिलने के बाद रेल प्रशासन ने बांद्रा रेलवे स्टेशन के पास मंगलवार से बड़े स्तर पर अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू किया  है जिसके तहत स्टेशन के नजदीक अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जा रहा है. पहले दिन करीब 500 अवैध झोंपड़ियों में से करीब 18 प्रतिशत को हटा दिया गया. कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए घटना स्थल पर 1,000 अधिकारियों को तैनात किया गया था जिसमें से करीब 400 मुंबई पुलिस के जवान, 400 आरपीएफ और जीआरपी के जवान शामिल थे.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया था आदेश

पीआरओ विनीत अभिषेक ने बताया कि 5 दिनों तक चलने वाले इस अतिक्रमण विरोधी अभियान का मकसद रेलवे को उसकी 5300 वर्ग मीटर की जमीन को वापस दिलाना है. अधिकारियों ने बताया रेलवे सुरक्षा क्षेत्रों को बनाए रखने और भविष्य में रेलवे की परियोजना के विस्तार के लिए परिसर का खाली होना आवश्यक है. बता दें कि ध्वस्तीकरण अभियान का आदेश 5 मई को बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद चलाया गया, जो पश्चिमी रेलवे को अवैध निर्माण को हटाने की अनुमति देता है. हालांकि कोर्ट ने अधिकारियों को 2021 में किए गए सर्वे के तहत पात्र पाए गए झुग्गीवासियों के अधिकारों की रक्षा के भी निर्देश दिए.