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India Daily

TMC में बढ़ी टूट की आशंका? विरोध प्रदर्शन से 45 MLA गायब, बंगाल की राजनीति में हलचल; टेंशन में ममता

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी के विरोध प्रदर्शन में सिर्फ 35 विधायक पहुंचे, जबकि 45 विधायक नदारद रहे. विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में गुटबाजी और टूट की अटकलें तेज हो गई हैं.

Dhiraj Kumar Dhillon
TMC में बढ़ी टूट की आशंका? विरोध प्रदर्शन से 45 MLA गायब, बंगाल की राजनीति में हलचल; टेंशन में ममता
Courtesy: Google

राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता, पार्टी भी नहीं. बंगाल में जो हो रहा है, उसे देखकर तो यही लग रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हारते ही उनकी पार्टी भी उनका साथ छोड़ती नजर आ रही है। स्थिति यह हो गई है कि पार्टी की ओर से विधानसभा परिसर में रखे गए विरोध ‌प्रदर्शन में केवल 35 विधायक ही पहुंचे. बता दें कि इस बार पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 80 विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. सियासी जानकारों की मानें तो इस प्रदर्शन में आधे से अधिक विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी में टूट की आशंका बढ़ा दी है.

बड़ी संख्या में विधायकों की गैर मौजूदगी से उठे सवाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद बुधवार को पहली बार ममता बनर्जी ने बड़ा विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया था, लेकिन इस प्रदर्शन की हवा उस समय निकल गई जब मात्र 35 विधायक ही प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे, जबकि 45 विधायक नदारद रहे. इतनी बड़ी संख्या में विधायकों की गैरमौजूदगी ने बंगाल की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है. सवाल उठ रहे है कि क्या ममता बनर्जी की पार्टी टूट के कगार पर पहुंच गई है?

टीएमसी का क्या था कार्यक्रम?

टीएमसी ने विधानसभा परिसर में डॉ. अंबेडकर प्रतिमा के पास राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा और सड़क किनारे से रेहडी-पटरी वालों को हटाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और धरने पर बैठे. विपक्ष में जाने के बाद टीएमसी का यह पहला बड़ा आंदोलन था. प्रदर्शन में आधे से अधिक विधायकों के गायब रहने पर पार्टी में दरार आने की बात कही जा रही है, हालांकि टीएमसी विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी और कलह से साफ इंकार किया है. 

मंगलवार को ममता बनर्जी ने बुलाई थी बैठक

इस प्रदर्शन से एक दिन पहले ही मंगलवार को कालीघाट पर पार्टी की एक अहम बैठक हुई थी. इस बैठक को पार्टी की मुखिया ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव व टीएमसी सांसद अ‌भिषेक बनर्जी ने संबोधित किया था. हालांकि इस बैठक में पार्टी में नेतृत्व के प्रति नाराजगी के संकेत भी मिले थे. सियासी जानकारों का कहना है कि पार्टी की विधानसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद विधायकों की गैरमौजूदगी बड़ा राजनीतिक संदेश मानी जा रही है.