चेन्नई: सिनेमा के पर्दे से निकलकर राजनीति के मंच पर अपनी धाक जमाने वाले थलपति विजय अब मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही एक्शन मोड में आ गए हैं. अपने विरोधियों को करारा जवाब देने और अपनी राजनीतिक दिशा साफ करने के लिए उन्होंने सीधे जनता का दरबार चुना है.
इसी के तहत सीएम विजय ने सोमवार को तिरुचिरापल्ली में एक विशाल धन्यवाद रैली को संबोधित किया. मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम था जहां उन्होंने अपने सूट पहनने की चॉइस पर हो रही आलोचनाओं का करारा जवाब दिया और अपने विजन को भी सामने रखा.
विजय ने कहा कि उन्हें इस बात पर हैरानी होती है कि कुछ लोग जरूरी जनहित के मुद्दों को छोड़कर उनके कपड़ों पर चर्चा कर रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि सूट पहनने को सिर्फ ताकतवर या खास लोगों का विशेषाधिकार क्यों माना जाना चाहिए? विजय के मुताबिक हर व्यक्ति को अपनी पसंद के कपड़े पहनने का पूरा हक है.
इसके साथ ही उन्होंने अपने ब्लैक एंड व्हाइट सूट पहनने के पीछे की बड़ी वजह भी बताई है. विजय ने कहा कि वे सिर्फ इन दो रंगों को इसलिए चुनते हैं क्योंकि यह उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है. वे अपने हर फैसले और काम में बिल्कुल साफ, ईमानदार और सीधे रहना चाहते हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि काला रंग एक ऐसा संदेश है जिसे तमिलनाडु के लोग बहुत अच्छी तरह समझते हैं.
यह रैली विधानसभा चुनावों में 'तमिलगा वेत्री कड़गम' यानी TVK को भारी समर्थन देने के लिए मतदाताओं का शुक्रिया अदा करने के लिए रखी गई थी. विजय ने उन सभी लोगों का आभार जताया जिनकी वजह से उनकी पार्टी को पहली ही चुनावी जीत मिली और राज्य में सरकार बनी. भाषण के दौरान उन्होंने अपनी तुलना पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन से किए जाने पर भी बात की. विजय ने साफ कहा कि वे खुद की तुलना उस महान नेता से नहीं कर रहे हैं बल्कि वे तो एमजीआर, अन्ना और पेरियार जैसे दिग्गजों के दिखाए रास्ते और आदर्शों पर चलने वाले एक मामूली अनुयायी हैं.
विजय ने इस मौके पर डीएमके पर भी जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को आए अभी कुछ ही हफ्ते हुए हैं लेकिन डीएमके ने उन पर हमले करना शुरू कर दिया है. उन्होंने दावा किया कि जनता ने पुरानी राजनीति को नकार कर एक नए रास्ते को चुना है. उन्होंने आत्मविश्वास से कहा कि अब तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से DMK और TVK के बीच का मुकाबला बन चुकी है. आखिरी में उन्होंने बिना किसी जाति या धर्म के भेदभाव के समाज के हर वर्ग के लिए काम करने का वादा किया और खुद को मुख्यमंत्री नहीं बल्कि जनता का 'पहला सेवक' बताया है.