वीडी सतीशन ने ली CM पद की शपथ, 10 साल बाद UDF की वापसी; मंच पर नजर आए कांग्रेस के कई दिग्गज

केरलम विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद अब राज्य को अपना नया मुख्यमंत्री मिल गया है. वीडी सतीशन ने सीएम पद की शपथ ले ली है. उनके अलावा 20 मंत्री भी शपथ ले रहे हैं.

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Shanu Sharma

वीडी सतीशन ने आज यानी 18 मई को केरलम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है. इसी के साथ UDF ने राज्य में 10 सालों से चल रहे LDF के राज को उखाड़ फेंका है. तिरुवनंतपुरम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सतीशन के साथ-साथ 20 मंत्री भी शपथ ले रहे हैं. जिनमें से 11 मंत्री कांग्रेस के हैं.

तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के शिवकुमार ने भी हिस्सा लिया. हालांकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया.

सतीशन के साथ इन मंत्रियों ने ली शपथ

सतीशन सरकार में शपथ लेने वाले 20 मंत्रियों में रमेश चेन्निथला, के मुरलीधरन और केपीसीसी प्रमुख सन्नी जोसेफ के साथ-साथ इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता पी.के कुन्हालीकुट्टी, पी.के बशीर, एन. शमसुद्दीन, के.एम शाजी और वी.ई अब्दुल गफ़ूर शामिल हैं. इनके अलावा मॉन्स जोसेफ, शिबू बेबी जॉन, अनूप जैकब, सी.पी जॉन, ए.पी अनिल कुमार, टी. सिद्दीकी, पी.सी विष्णुनाथ, रोजी एम जॉन, बिंदु कृष्णा, एम. लिजू, के.ए. तुलसी और ओ. जे जनीश का भी नाम शामिल है.


सीएम पद तक कैसे पहुंचे सतीशन?

वीडी सतीशन के राजनीतिक सफर की बात करें तो उन्होंने 2001 में पहली बार विधायकी जीती थी. उस समय उन्होंने शायद सोचा भी नहीं था कि वह एक दिन राज्य के मुखिया बनेंगे. एक गैर राजनीतिक परिवार से आने के बाद भी सतीशन पार्टी के लिए लगातार काम करते रहे. वह लगातार जनता की सेवा में लगे रहे, उन्होंने छोटे से छोटे सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. जिससे उनकी आम जनता के बीच मजबूत पकड़ बन गई. हालांकि इसके बाद भी कांग्रेस के कद्दावर नेताओं के दबदबे की वजह से कई बार सीएम की रेस में पीछे रह गए. सतीशन ने कई बार खुद की पार्टी के कामों पर भी सवाल उठाया, जिसके कारण उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. लेकिन अब वह दिन आ ही गया जब पार्टी ने उनकी जरूरत और उनके मूल्य को समझा और राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए चुन लिया.