BRICS 2026

क्या है ‘तिरुक्कुरल’? मोदी ने पुतिन को भेंट की इसकी रूसी भाषा में अनुवादित प्रति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तमिल की प्रसिद्ध कृति तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया, जो भारत-रूस के सांस्कृतिक संबंधों और तमिल साहित्य की वैश्विक पहुंच को दर्शाता है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तमिल साहित्य की प्रसिद्ध कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भेंट किया. दोनों नेताओं की यह मुलाकात नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई. भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. पुतिन भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार को भारत पहुंचे.

क्या है तिरुक्कुरल और क्यों है खास?

‘तिरुक्कुरल’ तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना है. इसे तमिल साहित्य की सबसे प्रतिष्ठित कृतियों में गिना जाता है. इसमें कुल 1,330 दोहे हैं, जिनमें नैतिकता, सदाचार, शासन, प्रेम और जीवन जीने के तौर-तरीकों जैसे विषयों पर विचार दिए गए हैं. मोदी ने पुतिन को इसका रूसी संस्करण देकर भारत की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को सामने रखा. रूसी भाषा में पुस्तक देने का उद्देश्य इसे पुतिन के लिए सहज और सीधे तौर पर समझने योग्य बनाना भी माना जा सकता है.

100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य

मोदी और पुतिन की बातचीत केवल सांस्कृतिक उपहार तक सीमित नहीं रही. दोनों देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. सूत्रों के अनुसार, दोनों नेता 2030 तक भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर बात कर सकते हैं. इसके साथ ही दोनों देशों की कंपनियों के बीच कारोबारी अवसर बढ़ाने और रूसी बाजार में भारतीय कंपनियों की पहुंच आसान बनाने के उपायों पर भी चर्चा संभावित है.

परमाणु ऊर्जा और अहम खनिजों पर नजर

भारत और रूस औद्योगिक सहयोग को भी नए क्षेत्रों में बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. इसमें रेलवे, सुरंग निर्माण और स्टील वैल्यू चेन जैसे क्षेत्र शामिल हैं. दोनों देश असैन्य परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा कर सकते हैं, जिसमें परमाणु ईंधन चक्र और परियोजनाओं के पूरे जीवनकाल से जुड़ा सहयोग शामिल है. इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, उर्वरक और कुशल कामगारों की आवाजाही भी बातचीत के एजेंडे में रह सकती है. भारत रणनीतिक और हाईटेक उद्योगों के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करना चाहता है, जबकि रूस भारत के लिए उर्वरकों का एक अहम स्रोत बना हुआ है.