menu-icon
India Daily

'वंदे मातरम्' का अपमान पड़ेगा भारी! अब गाना रोकने या बाधा डालने पर हो सकती है जेल

राज्यसभा में पेश नए संशोधन विधेयक में 'वंदे मातरम्' के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसे रोकने पर दंड का प्रस्ताव रखा गया है. सरकार ने इसे राष्ट्रीय सम्मान से जोड़ा, जबकि विपक्ष ने संवैधानिक अधिकारों पर सवाल उठाए.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'वंदे मातरम्' का अपमान पड़ेगा भारी! अब गाना रोकने या बाधा डालने पर हो सकती है जेल
Courtesy: social media

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से एक नया संशोधन विधेयक राज्यसभा में पेश किया है. प्रस्तावित कानून के तहत इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने वालों पर आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है. इस कदम पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई है.

सरकार ने बताया राष्ट्रीय सम्मान का सवाल

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया. प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर 'वंदे मातरम्' के गायन में बाधा डालता है या व्यवधान उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकेगी. सरकार का कहना है कि स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस राष्ट्रीय गीत की गरिमा और सम्मान की रक्षा करना आवश्यक है. भाजपा सांसद संजय सेठ ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए इसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा कदम बताया.

विपक्ष ने संवैधानिक अधिकारों का उठाया मुद्दा

विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं. माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की. उनका कहना है कि 'वंदे मातरम्' का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन इसके गायन को आपराधिक दायित्व से जोड़ना संविधान की भावना से मेल नहीं खाता. उन्होंने अनुच्छेद 19, 21 और 25 का हवाला देते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता से जुड़ा विषय बताया.

राजनीतिक बहस तेज होने के आसार

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी विधेयक का विरोध किया. उनका कहना है कि देशभक्ति का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसके लिए दंडात्मक कानून बनाते समय संवैधानिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. आने वाले दिनों में इस विधेयक पर संसद के भीतर और बाहर व्यापक चर्चा होने की संभावना है.