अमेरिका-ईरान जंग के बीच भारत की कूटनीतिक जीत, मंगलुरु पहुंचा एक और LPG कार्गो शिप; लाखों घरों में पहुंचेगी गैस

मध्य पूर्व में युद्ध के बीच भारत ने कूटनीति से LPG आपूर्ति बनाए रखी. अमेरिका से आया जहाज मंगलुरु पहुंचा, जिससे गैस संकट टला और लाखों घरों में रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित हुई.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को संकट में डाल दिया है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव के कारण. इस स्थिति का असर भारत पर भी पड़ सकता था, क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इस मार्ग पर निर्भर है. लेकिन भारत ने समय रहते कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाकर इस संकट को काफी हद तक टाल दिया है. अमेरिका से LPG आयात बढ़ाकर देश ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है.

होर्मुज संकट का असर

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है. यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का अहम हिस्सा है. ईरान की चेतावनी के बाद कई जहाजों ने रास्ता रोक दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई. भारत के कुछ जहाज भी इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं.

भारत की रणनीतिक तैयारी

संभावित संकट को देखते हुए भारत ने पहले ही वैकल्पिक आपूर्ति की दिशा में कदम बढ़ा दिए थे. सरकार और ऊर्जा कंपनियों ने अमेरिका के साथ संपर्क बढ़ाया और LPG आयात को प्राथमिकता दी. इसका उद्देश्य घरेलू जरूरतों को प्रभावित होने से बचाना और आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना था.

अमेरिका से गैस आपूर्ति

अमेरिका के टेक्सास से रवाना हुआ LPG जहाज ‘पिक्सिस पायनियर’ रविवार को मंगलुरु बंदरगाह पहुंच गया. यह कदम भारत के लिए राहत लेकर आया है. इसके अलावा, 25 और 29 मार्च को भी बड़े गैस जहाज भारत पहुंचने वाले हैं, जो अलग-अलग तेल कंपनियों के लिए आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे.

दक्षिण भारत को मिलेगा फायदा

मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंची गैस केवल स्थानीय जरूरतों के लिए नहीं है. यहां से पाइपलाइन के जरिए यह गैस बेंगलुरु और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाई जाएगी. इससे दक्षिण भारत के लाखों घरों में रसोई गैस की आपूर्ति बनी रहेगी और किसी तरह की कमी नहीं होगी.

युद्ध और वैश्विक असर

मध्य पूर्व में संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है और चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. मिसाइल हमले और सैन्य कार्रवाई से हालात और गंभीर हो गए हैं. इस युद्ध का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. ऐसे में भारत की रणनीति फिलहाल राहत देने वाली साबित हुई है.