गुरुवार की सुबह भारत के डिजिटल पेंमेंट सिस्टम की रीढ़ कहे जाने वाले यूपीआई ने लाखों यूजर्स को निराश कर दिया. पूरे देश में लोगों को सुबह करीब 7:45 बजे से यूपीआई के जरिए पेमेंट करने में भारी परेशानी हुई. इस रुकावट ने न केवल आम लोगों की डेली लाइफ को प्रभावित किया, बल्कि छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. डाउनडिटेक्टर के अनुसार रात 8:30 बजे तक 2,147 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 80% लेनदेन से संबंधित थीं.
एचडीएफसी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्रमुख बैंकों की यूपीआई सेवाएं इस खराबी की चपेट में आईं. गूगल पे, फोनपे और पेटीएम जैसे लोकप्रिय ऐप्स पर उपयोगकर्ताओं को 'सर्वर डाउन' या 'लेनदेन विफल' जैसे मैसेज दिखाई दिए. कई उपयोगकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की, जहां उन्होंने यूपीआई की इस असफलता को डिजिटल भारत की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाला बताया.
फिनटेक फर्म फाई कॉमर्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत के 65% लेनदेन यूपीआई के जरिए हुए हैं. छोटे और मीडियम लेनदेन में यूपीआई का दबदबा है, जबकि स्वास्थ्य, शिक्षा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में क्रेडिट कार्ड और ईएमआई का चलन बढ़ रहा है. इस तरह की बार-बार होने वाली रुकावटें डिजिटल पेमेंट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं, खासकर तब जब लोग नकदी पर निर्भरता कम कर रहे हैं.
इस रुकावट ने यूजर्स को नकदी या दूसे पेमेंट ऑप्शन्स की ओर धकेल दिया. छोटे व्यापारियों, जैसे कि सब्जी विक्रेताओं और किराना दुकानदारों, को खासा नुकसान हुआ, क्योंकि ग्राहक डिजिटल भुगतान न कर पाने के कारण खरीदारी छोड़कर चले गए. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी तकनीकी खामियों से बचने के लिए यूपीआई सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि डिजिटल इंडिया का सपना बिना रुकावट के साकार हो सके