भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में देरी के बावजूद, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अगले नेता के चयन के लिए एक महत्वपूर्ण फीडबैक प्रक्रिया शुरू की है. सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने अपने वरिष्ठ मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों से अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए राय मांगी है. इस प्रक्रिया में जातिगत समीकरण, लोकप्रियता और राजनीतिक विचारों को ध्यान में रखा जा रहा है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी ने 86 प्रमुख नेताओं से संपर्क किया है ताकि अगले कदम के लिए राय प्राप्त हो सके. एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह फीडबैक उन नेताओं को बढ़ावा देने के लिए नहीं है जो लोकप्रिय प्रबल दावेदार के रूप में उभरते हैं. इसके बजाय, यह जातिगत समीकरणों, हमारे राजनीतिक विचारों और किसी नेता की लोकप्रियता को गहराई से समझने के लिए किया गया है.” इस प्रक्रिया का उपयोग पहले उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के चयन में भी किया गया था.
प्रमुख राज्यों में देरी
बीजेपी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए कम से कम 36 में से 19 राज्यों में अध्यक्षों का चयन होना आवश्यक है. हालांकि, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली, मुंबई, पंजाब और मणिपुर जैसे प्रमुख राज्यों में अभी तक नए अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हुई है. पार्टी के संसदीय बोर्ड के एक सदस्य ने कहा, “जिन राज्यों में अभी तक अध्यक्षों का नाम तय नहीं हुआ है, वे प्रमुख राज्य हैं जैसे उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक. इन राज्यों से हमारा अधिकांश नेतृत्व आता है, बिना इनके हम आगे नहीं बढ़ सकते.”
बीजेपी-आरएसएस में मतभेद आए सामने
पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में देरी का कारण बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच सहमति की कमी है. एक सांसद ने कहा, “2014 के बाद से आरएसएस पार्टी के आंतरिक मामलों में शामिल नहीं रहा, लेकिन इस बार दोनों के बीच तनाव के कारण आरएसएस ने अपनी बात रख दी है.” इस मतभेद ने चयन प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है.
भविष्य की रणनीति
बीजेपी का यह फीडबैक अभियान पार्टी के लिए एक मजबूत और सर्वमान्य नेतृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है. ऐसे में पार्टी जल्द ही इस प्रक्रिया को पूरा कर राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा करने की उम्मीद कर रही है.