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उद्धव सेना पर फिर मंडराया टूट का खतरा, दिल्ली में संसदीय बैठक से नदराद रहे 6 सांसद

शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों के संसदीय दल की बैठक से अनुपस्थित रहने के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी में नए राजनीतिक संकट के संकेत मिले हैं. इन सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
उद्धव सेना पर फिर मंडराया टूट का खतरा, दिल्ली में संसदीय बैठक से नदराद रहे 6 सांसद
Courtesy: social media

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना को लेकर हलचल बढ़ गई है. गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में पार्टी के नौ में से केवल तीन लोकसभा सांसद शामिल हुए. छह सांसदों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है. माना जा रहा है कि ये सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के संपर्क में हैं. हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

बैठक से दूरी ने बढ़ाई अटकलें

दिल्ली में हुई संसदीय बैठक में केवल अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे उपस्थित रहे. वहीं संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमराजे निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश पाटिल अष्टीकर बैठक में नहीं पहुंचे. पार्टी नेतृत्व ने इसे गंभीरता से लिया है. सांसदों की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई कि क्या शिवसेना (यूबीटी) एक और बड़े विभाजन की ओर बढ़ रही है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पार्टी पहले ही बड़े टूट का सामना कर चुकी है.

कार्रवाई की तैयारी में पार्टी नेतृत्व

शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने संकेत दिया है कि अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा. उनका कहना है कि बैठक के लिए व्हिप जारी किया गया था इसके बावजूद सांसदों ने न तो भाग लिया और न ही कोई स्पष्ट कारण बताया. पार्टी अब उनसे लिखित जवाब मांगने की तैयारी कर रही है. इस कदम को संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

शिंदे गुट में शामिल होने की चर्चाएं तेज

शिवसेना के विधान परिषद सदस्य चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताया है. उन्होंने इसे महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम बताया. हालांकि अभी तक संबंधित सांसदों या शिंदे गुट की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है. इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यदि यह दावा सही साबित होता है तो लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकती है.

दोनों गुटों के बीच बढ़ी सियासी तल्खी

राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बैठक से गैरहाजिर नेताओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी और उन्हें पार्टी के प्रति वफादार न रहने वाला बताया. दूसरी ओर शिंदे गुट के नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपने गुट को ही वास्तविक संगठन मानने की मांग दोहराई है. आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है.