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क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस', जिसका सदस्य बनाने के लिए ट्रंप ने पीएम मोदी को दिया न्योता, 50 अन्य देशों को भी किया इनवाइट

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का निमंत्रण दिया. यह पहल मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने और वैश्विक संघर्ष समाधान में भारत के लिए अहम भूमिका निभा सकती है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस', जिसका सदस्य बनाने के लिए ट्रंप ने पीएम मोदी को दिया न्योता, 50 अन्य देशों को भी किया इनवाइट
Courtesy: social media

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है. इस अंतरराष्ट्रीय पहल का उद्देश्य गाजा और मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करना और वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए नया दृष्टिकोण अपनाना है. बोर्ड में शामिल होने वाले देशों को तीन साल की सदस्यता के दौरान बोर्ड की गतिविधियों में योगदान देना होगा, जिससे वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता को मजबूत किया जा सके.

क्या है बोर्ड ऑफ पीस?

'बोर्ड ऑफ पीस' ट्रंप की पहल है, जो गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम के दूसरे चरण के तहत शुरू की गई. इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में स्थिरता और पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग सुनिश्चित करना है. इसे वैश्विक संघर्षों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार किया गया है, ताकि शांति बहाल करने और शासन के समन्वय में मदद मिल सके.

भारत के लिए क्या हैं मायने

यदि भारत इस बोर्ड में शामिल होता है, तो प्रधानमंत्री मोदी तीन साल तक सदस्य रहेंगे. सदस्य देशों को आर्थिक योगदान देना होगा, जिसकी राशि लगभग 1 बिलियन डॉलर बताई जा रही है. हालांकि शुरुआत के तीन साल के लिए योगदान अनिवार्य नहीं होगा. भारत बोर्ड की गतिविधियों और गाजा में अगले चरण के युद्धविराम और पुनर्निर्माण पर नजर रखेगा.

प्रधानमंत्री मोदी को भेजा पत्र

ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर यह निमंत्रण दिया. पत्र में ट्रंप ने इसे 'मध्य पूर्व में शांति बहाल करने के लिए एक ऐतिहासिक और साहसिक प्रयास' बताया. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस पत्र को सोशल मीडिया पर साझा किया और बताया कि बोर्ड का उद्देश्य गाजा में स्थिरता और समृद्धि लाना है.

अन्य आमंत्रित देश

भारत के अलावा लगभग 50 देशों को आमंत्रित किया गया है. इनमें इजरायल, मिस्र, तुर्की, कतर, पाकिस्तान, कनाडा और अर्जेंटीना शामिल हैं. बोर्ड की सदस्यता सूची डावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक में सार्वजनिक की जा सकती है. यह पहल वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका को और मजबूत करने का अवसर देगी.

कार्रवाई समिति और सदस्यता शुल्क

बोर्ड की दिशा-निर्देशन और नीति कार्यान्वयन के लिए एक कार्यकारी समिति बनाई गई है. इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जारेड कुशनर, टोनी ब्लेयर, अजय बंगा और रॉबर्ट गेब्रियल शामिल हैं. सदस्य देशों को बोर्ड की गतिविधियों और गाजा में स्थायी शांति को सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय योगदान करना होगा.