अलास्का में हुई ट्रंप और पुतिन की मीटिंग ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है. यह बैठक यूक्रेन युद्ध को लेकर उम्मीदों के साथ आयोजित की गई थी, लेकिन इसका ठोस समाधान निकलने की जगह केवल भविष्य की चर्चाओं की संभावना जताई गई.
इसी बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन का बयान चर्चा में है, जिन्होंने साफ कहा कि पुतिन ने इस मुलाकात से अपनी रणनीति को और मजबूत किया है.
जॉन बोल्टन ने सीएनएन से बातचीत में कहा कि पुतिन ने इस बैठक से वह हासिल कर लिया जिसकी लंबे समय से कोशिश थी. उन्होंने बताया कि पुतिन का असली मकसद रिश्तों को दोबारा मजबूत करना था और इसमें वे सफल रहे हैं. बोल्टन के मुताबिक पुतिन अब तक लगाए गए प्रतिबंधों से भी बच निकले हैं और उन पर युद्धविराम थोपने जैसी कोई मजबूरी नहीं बनी. यही कारण है कि उन्हें इस बैठक का सबसे बड़ा विजेता कहा जा सकता है.
वहीं दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप इस बैठक से ज्यादा कुछ हासिल नहीं कर पाए. बोल्टन ने कहा कि ट्रंप के पास न तो कोई नया समझौता है और न ही कोई ठोस घोषणा. उन्हें केवल "आगे और बैठकों" का वादा मिला है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह की परिस्थितियों से यह जाहिर होता है कि ट्रंप की कूटनीतिक तैयारी उतनी मजबूत नहीं थी जितनी पुतिन की.
बोल्टन ने ट्रंप की शारीरिक भाषा पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान ट्रंप बेहद थके हुए लग रहे थे. हालांकि वह निराश नहीं दिखे, लेकिन उनकी थकान यह संकेत दे रही थी कि वार्ता का दबाव उन पर हावी हो रहा था. बोल्टन का मानना है कि यह थकान उनके कूटनीतिक रवैये और फैसलों पर भी असर डाल सकती है.
भले ही बोल्टन ने इस वार्ता को पुतिन की जीत बताया हो, लेकिन ट्रंप ने इसे अपनी सफलता करार दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अलास्का की बैठक बेहद "सफल" रही. ट्रंप ने यह भी कहा कि अब उनका लक्ष्य सिर्फ युद्धविराम नहीं, बल्कि सीधे-सीधे एक शांति समझौता करना है, जिससे रूस-यूक्रेन युद्ध पूरी तरह समाप्त हो सके. उनका कहना था कि युद्धविराम अक्सर टूट जाते हैं, जबकि शांति समझौता स्थायी हल हो सकता है.