TMC के 20 बागी सांसदों के NDA संग जाने से संसद में बदल सकते हैं सियासी समीकरण

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होकर एनडीए को समर्थन देने से लोकसभा में सत्ता पक्ष की ताकत बढ़ सकती है. इससे इंडिया ब्लॉक कमजोर पड़ सकता है और सरकार को अहम विधेयक पारित कराने में सहूलियत मिल सकती है.

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Kuldeep Sharma

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होकर एनडीए को समर्थन देने से लोकसभा में सत्ता पक्ष की ताकत बढ़ सकती है. इससे विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की स्थिति कमजोर होने और विधायी रणनीति प्रभावित होने की चर्चा तेज हो गई है.

लोकसभा की राजनीति में एक नए घटनाक्रम ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है. तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों ने खुद को नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करने का फैसला किया है. इसके साथ ही इस समूह ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को समर्थन देने का ऐलान किया है. इस कदम को संसद में शक्ति संतुलन बदलने वाली घटना माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इसका असर आने वाले संसद सत्रों में सरकार और विपक्ष दोनों की रणनीति पर पड़ सकता है.

लोकसभा में बढ़ेगी एनडीए की ताकत

तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने के बाद एनडीए को संख्यात्मक बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है. यदि यह समर्थन पूरी तरह प्रभावी रहता है तो लोकसभा में एनडीए की कुल संख्या 312 तक पहुंच सकती है. इससे गठबंधन को सदन में अपनी स्थिति और मजबूत करने में मदद मिलेगी. दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस की संसदीय ताकत घटने से विपक्षी खेमे को झटका लग सकता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसद में संख्या बल कई बार विधायी फैसलों की दिशा तय करता है और यह बदलाव भविष्य की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है.


विधेयकों को लेकर सरकार को मिल सकती है राहत

संसद में अधिक समर्थन मिलने से सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है. खासतौर पर उन प्रस्तावों पर, जिनके लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होती है एनडीए को अतिरिक्त सहयोग मिल सकता है. पिछले कुछ सत्रों में कई अहम विधेयकों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली थी. ऐसे में सांसदों की संख्या बढ़ने से सरकार की स्थिति मजबूत हो सकती है. हालांकि किसी भी विधेयक का भविष्य अंततः सदन में होने वाली चर्चा, राजनीतिक सहमति और मतदान पर ही निर्भर करेगा.

इंडिया ब्लॉक के सामने नई चुनौती

इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक पर पड़ सकता है. तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की संख्या कम होने से विपक्ष की सामूहिक ताकत प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. वहीं बागी सांसदों का दावा है कि उनका विलय दलबदल विरोधी कानून के तहत निर्धारित दो-तिहाई नियमों के अनुरूप किया गया है. यदि यह प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध मानी जाती है तो एनसीपीआई भविष्य में एनडीए के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगी दल बन सकती है. ऐसे में आगामी संसद सत्रों में सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक मुकाबला नए रूप में देखने को मिल सकता है.