आपतकाल की बरसी पर पीएम मोदी ने कांग्रेस को घेरा है. पीएम मोदी ने अपने पहले ट्वीट में कहा कि आज का दिन उन सभी महान पुरुषों और महिलाओं को श्रद्धांजलि देने का दिन है, जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया. 25 जून 1975 मे लगी इमरजेंसी 21 मार्च 1977 यानी कि पूरे 21 महीने चला था. आपातकाल को आज 49 साल पूरे हो गए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि आपातकाल लगाने वालों को संविधान के प्रति अपने प्रेम का इज़हार करने का कोई अधिकार नहीं है. आपातकाल लागू किए जाने की 49वीं वर्षगांठ पर, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि काले दिनों ने दिखाया कि कैसे कांग्रेस ने बुनियादी स्वतंत्रताओं को नष्ट किया और संविधान को रौंद दिया.
Today is a day to pay homage to all those great men and women who resisted the Emergency.
The #DarkDaysOfEmergency remind us of how the Congress Party subverted basic freedoms and trampled over the Constitution of India which every Indian respects greatly.— Narendra Modi (@narendramodi) June 25, 2024Also Read
उन्होंने लिखा कि आज का दिन उन सभी महान पुरुषों और महिलाओं को श्रद्धांजलि देने का दिन है, जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया था. आपातकाल के काले दिन हमें याद दिलाते हैं कि किस तरह कांग्रेस पार्टी ने बुनियादी स्वतंत्रताओं को नष्ट किया और भारत के संविधान को रौंद दिया, जिसका हर भारतीय बहुत सम्मान करता है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को आपातकाल लगाया था. उन्होंने 1977 में चुनावों की घोषणा की. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हर लोकतांत्रिक सिद्धांत की अवहेलना की और देश को जेल बना दिया. आपातकाल के दौरान कांग्रेस से असहमत लोगों को प्रताड़ित किया गया और सामाजिक रूप से प्रतिगामी नीतियां लागू की गईं.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा-जिन लोगों ने आपातकाल लगाया, उन्हें हमारे संविधान के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने का कोई अधिकार नहीं है. ये वही लोग हैं जिन्होंने असंख्य अवसरों पर अनुच्छेद 356 लगाया, प्रेस की स्वतंत्रता को नष्ट करने के लिए विधेयक पारित किया, संघवाद को नष्ट किया और संविधान के हर पहलू का उल्लंघन किया. उन्होंने कहा कि जिस मानसिकता के कारण आपातकाल लगाया गया, वह उसी पार्टी में जीवित है जिसने इसे लगाया था. वे अपने दिखावे के माध्यम से संविधान के प्रति अपने तिरस्कार को छिपाते हैं, लेकिन भारत के लोगों ने उनकी हरकतों को देख लिया है और इसीलिए उन्होंने उन्हें बार-बार खारिज किया है.
सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने संसद परिसर में संविधान की प्रतियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया. कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और डीएमके एम कनिमोझी समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. बाद में जब प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ ली तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संविधान की एक प्रति दिखाई.