menu-icon
India Daily

'पायलट को दोष मत दो.. ', अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे में पायलट के पिता के याचिका पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया अहमदाबाद विमान हादसे में पायलट कमांडर सुमीत सभरवाल के पिता की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. अदालत ने कहा कि पायलट को दोष नहीं दिया जा सकता और जांच स्वतंत्र व निष्पक्ष होनी चाहिए.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
Plane crash and Supreme Court India daily
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद में हुई एयर इंडिया विमान दुर्घटना मामले में एक अहम कदम उठाया है. 91 वर्षीय पुष्कराज सभरवाल की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया गया है. पुष्कराज, उस विमान के पायलट कमांडर सुमीत सभरवाल के पिता हैं, जिनकी इस हादसे में मौत हुई थी. इस दुर्घटना में कुल 260 लोगों की जान गई थी.

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि हादसे की जांच एक स्वतंत्र न्यायिक समिति के माध्यम से की जाए, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाए. उनका कहना है कि मौजूदा जांच प्रक्रिया स्वतंत्र नहीं है और इस घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक जांच पर्याप्त नहीं मानी जा सकती.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पायलट पर कोई दोषारोपण नहीं किया जा सकता. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह भी कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में पायलट के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की गई है. अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि उन्हें यह बोझ नहीं उठाना चाहिए कि उनके बेटे को दोषी ठहराया जा रहा है, क्योंकि किसी ने भी उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया है.

कब होगी अगली सुनवाई?

याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने दलील दी कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की जांच स्वतंत्र नहीं है. उन्होंने कहा कि यह चार महीने से चल रही है और अब तक पारदर्शी परिणाम सामने नहीं आए हैं.  अदालत ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए कहा कि यह मामला 10 नवंबर को एक अन्य समान याचिका के साथ सुना जाएगा. न्यायमूर्ति बागची ने यह भी टिप्पणी की कि अगर जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाना है, तो इसके लिए वैधानिक प्रावधानों को भी चुनौती देनी होगी.

विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स को क्यों किया खारिज?

सुनवाई के दौरान अदालत ने विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स को भी खारिज कर दिया, जिसमें पायलट की गलती बताई गई थी. न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि यह 'घटिया रिपोर्टिंग' है और भारत में कोई भी यह नहीं मानता कि गलती पायलट की थी. इस मामले का परिणाम भारत में विमानन दुर्घटनाओं की जांच प्रणाली पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है. पीड़ितों के परिवार एयर इंडिया की उड़ान में हुई मौतों के कारणों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच का इंतजार कर रहे हैं.

सम्बंधित खबर