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जजों पर फेंके कागज, CJI को लेकर कही आपत्तिजनक बात; सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच वकील ने काटा बवाल

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने न्यायाधीशों के प्रति अभद्र व्यवहार किया, कागजात उछाल दिए और कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया. इसके बाद कोर्ट ने उसे तुरंत अदालत कक्ष से बाहर हटाने का निर्देश दिया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
जजों पर फेंके कागज, CJI को लेकर कही आपत्तिजनक बात; सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच वकील ने काटा बवाल
Courtesy: social media

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने अदालत की कार्यवाही को कुछ समय के लिए प्रभावित कर दिया. इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान स्वयं अपना पक्ष रख रहे याचिकाकर्ता ने न्यायाधीशों के प्रति असामान्य और आक्रामक रवैया अपनाया. कथित तौर पर उन्होंने अदालत में अनुचित भाषा का प्रयोग किया और न्यायपीठ की ओर दस्तावेज भी उछाल दिए, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई की गई.

सुनवाई के दौरान बढ़ा विवाद

यह मामला जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था. सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता ने अदालत से आदेश मांगने के बजाय न्यायाधीशों को ही निर्देश देने जैसी भाषा का इस्तेमाल किया. अदालत ने इस व्यवहार पर आपत्ति जताई और उनसे संयमित तरीके से अपनी बात रखने को कहा. इसके बावजूद उनका रवैया शांत नहीं हुआ और माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया.

कागजात फेंकने के बाद कोर्ट ने लिया सख्त रुख

कार्यवाही के दौरान याचिकाकर्ता ने अपनी केस फाइल न्यायपीठ की दिशा में उछाल दी और कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं. इसके बाद अदालत ने तुरंत सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया. सुरक्षा स्टाफ ने उन्हें अदालत कक्ष से बाहर ले जाकर स्थिति को सामान्य किया. घटना के बाद कुछ समय के लिए अदालत का माहौल गंभीर बना रहा.

पुरानी घटना की भी हुई चर्चा

इस घटनाक्रम के बाद कुछ महीने पहले हुई एक अन्य घटना की भी चर्चा होने लगी, जब तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एक वकील के व्यवहार पर विवाद खड़ा हुआ था. उस मामले में भी अदालत की गरिमा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे और बाद में संबंधित वकील के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई थी.

अदालत की गरिमा पर फिर उठा सवाल

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय में असहमति जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन उसकी एक संवैधानिक और मर्यादित प्रक्रिया होती है. अदालत के भीतर अनुशासन और सम्मान बनाए रखना न्याय व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है. इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि न्यायालय की कार्यवाही में अनुचित आचरण को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता.