नई दिल्ली: चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है. करीब एक सप्ताह पहले एक्स-मिल भाव 68 रुपये किलो तक पहुंच गया था, जो अब घटकर 53 से 55 रुपये किलो के आसपास आ गया है. महाराष्ट्र में कीमत 51 से 52 रुपये और कोलकाता में थोक भाव करीब 53 रुपये किलो बताया जा रहा है. हालांकि खुदरा बाजार में इसका पूरा फायदा अभी उपभोक्ताओं को नहीं मिला है.
चीनी के दाम अचानक बढ़ने के पीछे कम उत्पादन की आशंका और बाजार में कृत्रिम कमी की चर्चा थी. सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दिया. इसके बाद कीमतों में नरमी शुरू हुई. महाराष्ट्र और कोलकाता जैसे प्रमुख बाजारों में भी थोक भाव नीचे आए हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बाजार में उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर और दबाव बन सकता है.
सरकार ने करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की तैयारी की है. इनमें से लगभग 80 हजार टन की चार खेप निर्यातक देशों के बंदरगाहों से रवाना हो चुकी हैं. इनके भारत पहुंचने के बाद चीनी को रिफाइन कर घरेलू बाजार में उतारा जाएगा. इसके अलावा देश के बंदरगाहों पर पहले से मौजूद तीन से चार लाख टन चीनी को भी बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज की जा रही है.
सरकार ने अगस्त के लिए तय लेकिन अब तक बाजार में नहीं आई चीनी का कोटा जारी करने का निर्देश दिया है. डीलरों को 30 नवंबर तक अधिकतम 400 टन स्टॉक रखने की सीमा दी गई है. एक सितंबर से बड़े थोक खरीदार भी 15 दिन की जरूरत से ज्यादा चीनी नहीं रख सकेंगे. केंद्र और राज्यों की संयुक्त टीमों ने स्टॉक की जांच के लिए एक हजार से ज्यादा स्थानों पर कार्रवाई की है.
सरकारी निगरानी बढ़ने से बाजार में जमाखोरी को लेकर दबाव बढ़ा है. ज्यादा मुनाफे की उम्मीद में स्टॉक रोककर रखने वाले कारोबारियों के लिए परिस्थितियां बदल गई हैं. अब बाजार में माल निकालना उनके लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है. सरकार का उद्देश्य आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रखना है, ताकि कृत्रिम कमी के कारण कीमतों में अचानक उछाल न आए और उपभोक्ताओं को राहत मिल सके.
सरकार ने प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए भी आपूर्ति बढ़ाने का रास्ता अपनाया है. नासिक मंडी में सोमवार को प्याज करीब 50 रुपये किलो था, जो बुधवार को घटकर 42 रुपये रह गया. उपभोक्ता मामले की सचिव निधि खरे के मुताबिक देश में प्याज की कमी नहीं है. इस साल उत्पादन करीब 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है. बफर स्टॉक से प्याज निकालकर दिल्ली समेत बड़े शहरों में 35 रुपये किलो की दर से बिक्री की तैयारी है.