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India Daily

India Nepal Aid: बाढ़ के बीच नेपाल की मदद को भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत ने राहत अभियान में सहयोग बढ़ाया है. भारत ने सुपर हरक्यूलिस विमान से 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां नेपाल भेजी हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
India Nepal Aid: बाढ़ के बीच नेपाल की मदद को भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री
Courtesy: social media

नई दिल्ली: नेपाल में भोटेकोशी नदी की अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है. इस मुश्किल घड़ी में भारत ने पड़ोसी देश की मदद के लिए राहत सामग्री भेजी है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत की ओर से दवाइयों और जरूरी सामान समेत 10 टन HADR सहायता रवाना की गई है.

भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री

नेपाल में बाढ़ से बिगड़े हालात के बीच भारत ने राहत और बचाव प्रयासों में सहयोग देने के लिए 10 टन सामग्री भेजी है. यह सहायता सुपर हरक्यूलिस विमान के जरिए पहुंचाई गई है. राहत पैकेज में सोलर लैंप, आवश्यक दवाइयां और दूसरी जरूरी सामग्री शामिल है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत इस कठिन समय में नेपाल और उसके नागरिकों के साथ खड़ा है. उन्होंने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों और प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना भी जताई.

बाढ़ से कई जिलों में भारी नुकसान

नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे मध्य नेपाल के कई जिलों में अचानक आई बाढ़ ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हादसे में कम से कम 95 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. बाढ़ के तेज बहाव में पुल बह गए और कई बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा. करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं के प्रभावित होने की भी जानकारी है. रसुवा जिले से शुरू हुआ पानी धादिंग, नुवाकोट और चितवन तक पहुंचा, जिससे कम से कम चार स्थायी पुल और कुछ अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हुए.

भोटेकोशी में अचानक कैसे आया सैलाब

अचानक आई बाढ़ के पीछे प्राकृतिक घटनाओं की एक श्रृंखला को वजह माना जा रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से संकेत मिला है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास पहाड़ी चट्टानों के खिसकने और हिमस्खलन के कारण नदी में अचानक पानी और मलबा बढ़ा. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, सीमा क्षेत्र में लेंडे नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद तिमुरे में भोटेकोशी का पानी और मलबा त्रिशूली नदी तक फैल गया. इससे निचले इलाकों में हालात तेजी से बिगड़ गए.

भूकंप से जुड़ी कड़ी भी सामने आई

बाढ़ की घटना के आसपास तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आने की जानकारी भी सामने आई है. काठमांडू पोस्ट ने काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और जलवायु शोधकर्ता रिजन भक्त कायस्थ के हवाले से बताया कि बाढ़ के समय के आसपास तिब्बत की ओर भूकंप दर्ज हुआ था. अमेरिकी भूगर्भ सर्वे के अनुसार, सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर तिब्बत क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था. इसका केंद्र गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में बताया गया है. विशेषज्ञ इस भूकंपीय गतिविधि और पहाड़ी मलबे के खिसकने के बीच संभावित संबंध की जांच कर रहे हैं.