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आवारा कुत्तों पर 'सुप्रीम' टिप्पणी, हर डॉग बाइट से हुई मौत पर राज्यों से वसूला जाएगा भारी मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि हर डॉग बाइट से हुई मौत पर संबंधित राज्य सरकार से भारी मुआवजा वसूला जाएगा.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
आवारा कुत्तों पर 'सुप्रीम' टिप्पणी, हर डॉग बाइट से हुई मौत पर राज्यों से वसूला जाएगा भारी मुआवजा
Courtesy: social media

नई दिल्ली: देश में आवारा कुत्तों के हमलों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकारों को कड़ी फटकार लगाई है. शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के क्रियान्वयन में सरकारें पूरी तरह नाकाम रही हैं. कोर्ट ने चेतावनी दी कि डॉग बाइट से किसी भी नागरिक की मौत होने पर संबंधित सरकार को भारी मुआवजा देना पड़ेगा. यह टिप्पणी बढ़ते हमलों और लचर व्यवस्था के बीच आई है.

सरकारों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मंगलवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या दशकों से चली आ रही है. अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उनकी विफलता के कारण समस्या हजार गुना बढ़ चुकी है.

डॉग बाइट से मौत पर भारी मुआवजे की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर उस व्यक्ति- चाहे वह पुरुष हो, महिला हो या बच्चा जिसकी मौत डॉग बाइट से हुई है, उसके लिए संबंधित सरकार को भारी मुआवजा देना होगा. अदालत ने कहा कि अब इस मुद्दे को हल्के में नहीं लिया जाएगा और जवाबदेही तय की जाएगी.

ABC नियमों के पालन में ‘पूरी तरह नाकामी’

पीठ ने कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों को लागू करने में राज्य सरकारें बुरी तरह असफल रही हैं. अदालत के अनुसार, अगर समय रहते नसबंदी और टीकाकरण जैसे कदम प्रभावी ढंग से उठाए गए होते, तो आज हालात इतने भयावह नहीं होते.

डॉग लवर्स पर भी कोर्ट की टिप्पणी

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कुछ डॉग लवर्स और याचिकाकर्ताओं के तर्कों को 'जमीनी हकीकत से दूर' बताया था. अदालत ने कहा कि उसके पास ऐसे कई वीडियो हैं, जिनमें आवारा कुत्ते बच्चों और बुजुर्गों पर हमला करते दिख रहे हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

महिला फीडर्स के मुद्दे पर अदालत का रुख

सुनवाई के दौरान महिला डॉग फीडर्स से उत्पीड़न के आरोप भी उठे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे कानून-व्यवस्था का विषय बताते हुए इस पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि पीड़ित महिलाएं ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करा सकती हैं और स्थानीय प्रशासन कार्रवाई करेगा.