नई दिल्ली: गलवान घाटी की घटना के बाद भारत और चीन के रिश्तों में आई कड़वाहट के बीच एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. चीन की सत्ताधारी चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे पर दिल्ली पहुंचा है. इस प्रतिनिधिमंडल ने पहले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और इसके बाद दिल्ली के झंडेवालान स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्य कार्यालय में पहुंचने का कार्यक्रम तय किया गया.
गलवान के बाद इस तरह की सियासी बैठकों को रिश्तों में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प ने दोनों देशों के संबंधों को सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था. 1962 के युद्ध के बाद यह सबसे गंभीर टकराव माना गया. इस घटना के बाद करीब पांच साल तक दोनों देशों के बीच अविश्वास और दूरी बनी रही.
Ms Sun Haiyan, Vice Minister, International Dept of Communist Party of China (IDCPC) visited today BJP head Office. During the meeting we discussed how to enhance communication and interaction between BJP and CPC. 🇮🇳🤝🇨🇳 pic.twitter.com/KdBZVyYUMW
— Arun Singh (@ArunSinghbjp) January 12, 2026
ऐसे माहौल में चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का बीजेपी मुख्यालय पहुंचना राजनीतिक रूप से चौंकाने वाला कदम माना जा रहा है. सीपीसी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई इंटरनेशनल डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के वाइस मिनिस्टर सुन हैयान ने की. बीजेपी मुख्यालय में हुई बैठक में पार्टी महासचिव अरुण सिंह और विदेश मामलों के प्रभारी डॉ विजय चौथाईवाले समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे.
अरुण सिंह ने सोशल मीडिया पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों दलों के बीच संवाद और बातचीत को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई. बीजेपी के विदेश मामलों के इंचार्ज डॉ विजय चौथाईवाले ने भी बताया कि यह बैठक इंटर पार्टी कम्युनिकेशन को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई.
इस बैठक में भारत में चीन के राजदूत शू फेहॉन्ग की मौजूदगी भी रही. इसके बाद सीपीसी प्रतिनिधिमंडल का आरएसएस मुख्यालय में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से मिलने का कार्यक्रम तय हुआ. आरएसएस इस समय अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है, ऐसे में इस मुलाकात को सामान्य नहीं माना जा रहा है.
बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस तरह की मुलाकातें दुनिया भर में राजनीतिक दलों के बीच होती रहती हैं और इसका मतलब किसी गुप्त समझौते से नहीं है. जानकारों के अनुसार अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक बातचीत को नई गति मिली है. इसी क्रम में यह दौरा भारत चीन संबंधों में धीरे धीरे बदलाव का संकेत माना जा रहा है.